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जवानों के शौर्य और नई राजनीतिक इच्छाशक्ति से लिखी गई विजय की गाथा… PM मोदी ने जवानों को खिलाई मिठाई, देंखे Video

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PM Modi Bastar Visit: बस्तर. दशकों तक माओवादी हिंसा और गोलियों की गड़गड़ाहट से दहलने वाले बस्तर में इस बार की दीपावली ऐतिहासिक रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में जवानों के बीच पहुंचकर ऐलान किया कि यह नक्सलवाद पर पूर्ण विजय हासिल करने के बाद की पहली दीपावली है. प्रधानमंत्री ने जवानों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि जब आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तब बाहरी दुश्मन भी सिर उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता.

‘लाइलाज बीमारी’ के भ्रम को तोड़ा

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक समय था जब नक्सलियों के मुकाबले हमारे वीर जवानों की शहादत का आंकड़ा ज्यादा रहता था. दुर्भाग्य से तब की सरकारों ने नक्सलवाद को एक ‘लाइलाज बीमारी’ मानकर छोड़ दिया था और यह स्वीकार कर लिया था कि यह तो ऐसे ही चलता रहेगा.

पीएम ने दो टूक कहा कि कोई भी देश अपने दुश्मनों के सामने “ऐसे ही चलता रहेगा” के अप्रोच के साथ नहीं चल सकता. देश को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए दुश्मनों को बुलंद हौसलों के साथ कुचलना जरूरी होता है. 2014 के बाद देश में वही राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई गई, जिसके परिणामस्वरूप आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

47 साल में पहली बार शून्य कैजुअल्टी का ऐतिहासिक मील का पत्थर

प्रधानमंत्री ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे नीयत और नीतियों के सही होने से ज़मीन पर क्रांतिकारी बदलाव आए. पिछले 47 वर्षों में यह पहला मौका है जब एक साल के भीतर सीआरपीएफ (CRPF) के एक भी जवान को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी. यह सुरक्षा बलों के संयम, साहस और रणनीतिक बढ़त की सबसे बड़ी जीत है.

सुरक्षा बलों के बंधे हाथ खुले, सप्लाई लाइन पर हुआ प्रहार

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पहले की सरकारों ने ज़मीन पर लड़ रहे सुरक्षाकर्मियों के हाथ बांध रखे थे. जवानों को खुलकर जवाबी कार्रवाई करने की आज़ादी नहीं थी. वर्तमान सरकार ने सुरक्षा बलों को हर जरूरी फैसला लेने की पूर्ण स्वतंत्रता दी.

 इसके साथ ही, माओवादियों और आतंकवादियों की वित्तीय कमर तोड़ने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए. नकली करेंसी के नेटवर्क और अवैध फंडिंग को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, जिससे उनकी सप्लाई लाइन, हथियारों की खेप और नई भर्तियों का सिलसिला ठप पड़ गया.

महलों के सन्नाटे और बस्तर का दर्द

दंतेवाड़ा के 2010 के नरसंहार (जब 76 जवान शहीद हुए थे) और रोजाना होने वाली वारौतों को याद करते हुए पीएम ने कहा कि तब महलों में बैठने वाले प्रभावशाली नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी. लेकिन आज संवेदनशीलता के साथ किए गए प्रयासों से न केवल माओवादी आतंकवाद की कमर टूट चुकी है, बल्कि बस्तर के आम नागरिक और पीड़ित लोग भी पूरी मजबूती से सरकार और सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं.

हमने सुरक्षा बलों को हर फैसला लेने की छूट दी

पीएम मोदी ने कहा कि  ‘पहले की सरकारों ने सुरक्षा बलों के हाथ बांध रखे थे. हमने हर निर्णय लेने की आजादी दी. वामपंथी उग्रवाद को जो सपोर्ट मिलता था हमने उसे रोकने का भी काम किया. हम एक बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे है. हमारा लक्ष्य था कि किसी मां की गोद सूनी न हो. किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो. इसलिए जबतक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो गया. हम संकल्प के साथ लगातार लगे रहे. कोई प्रचार-प्रसार नहीं. कोई दिखावा नहीं. हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी.’

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