CG News: बस्तर के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से जारी धर्म परिवर्तन और सदियों पुरानी रूढ़िगत आदिवासी परंपराओं के बीच बढ़ते टकराव के बाद अब ग्राम सभाओं ने सीधे मोर्चा संभाल लिया है. जगदलपुर शहर से सटे नानगुर तहसील के ग्राम बड़े बोदल में आदिवासियों ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी ‘पेसा कानून 1996’ की शक्तियों का प्रयोग करते हुए ईसाई मिशनरियों, बाहरी पादरियों और प्रचारकों की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगा दिया है.
गांव के पुजारी सुखराम नाग ने बताया कि गांव के केंद्र बिंदु ‘अटल चौक’ पर ग्रामीणों ने विधिवत सार्वजनिक सूचना बोर्ड स्थापित कर दिया है. इस बोर्ड में साफ शब्दों में चेतावनी जारी की गई है कि गांव की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार की ईसाई प्रार्थना सभा, चमत्कार का दावा करने वाली चंगाई सभा, या बाहरी पादरी-प्रचारकों का प्रवेश ग्राम सभा की लिखित अनुमति के बिना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. धर्मान्तरण के इस गंभीर मुद्दे को लेकर 14 अक्टूबर को अटल चौक पर ग्राम सभा बुलाई गई थी.
ग्रामीण बोले – चमत्कार के नाम पर लालच दिया जा रहा
ग्रामीणों का आरोप है कि बीमारी ठीक करने या चमत्कार के नाम पर ‘चंगाई सभाएं’ आयोजित कर सीधे-सादे ग्रामीणों को लालच दिया जा रहा था. धर्मान्तरण के बाद लोग देवगुड़ी, माटी पूजा, और शीतला पूजा जैसी पारंपरिक आदिवासी मान्यताओं से कटने लगे थे, जिससे गांव का पारंपरिक और रूढ़िगत ढांचा पूरी तरह टूट रहा था. इसी को बचाने के लिए ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से यह सख्त कदम उठाया है.
बस्तर के दूसरे जिलों में भी धधक रही आग, जानिए कहां क्या हुआ
नारायणपुर (बेनूर व गोर्रा): आदिवासियों और ईसाई समुदाय के बीच हिंसक झड़पें, चर्च में तोड़फोड़, व तत्कालीन एसपी पर हमला. 60 से अधिक गांवों की ग्राम सभाओं ने पादरियों के गांव में घुसने पर पूरी तरह बैन लगाया.
कांकेर (अंतागढ़ व कोयलीबेड़ा): सर्वआदिवासी समाज के नेतृत्व में गांवों की सीमाओं पर पाबंदी के बोर्ड टांगे गए. बाहरी प्रचारकों को ग्रामीणों ने पकड़कर सीधे पुलिस के हवाले किया.
कोंडागांव (अंदाबेड़ा व धनोरा): शव दफनानेको लेकर दर्जनों गांवों में खूनी संघर्ष, और तनाव की स्थिति बनी. मूल आदिवासियों की जमीन पर अंतिम संस्कार पर रोक, व सामाजिक बहिष्कार का प्रस्ताव पास.
बस्तर (तोकापालव बस्तानार): घरों में चलने वाली गुप्त प्रार्थना सभाओं का ग्रामीणों द्वारा लगातार कड़ा विरोध. बिना माटी पुजारी और पटेल की मंजूरी के किसी भी धार्मिक बैठक पर सख्त पाबंदी.
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