चैतुरगढ़ में 3000 फीट की ऊंचाई पर है मां महिषासुर मर्दिनी का दरबार, अनोखे मंदिर में लगा भक्तों का तांता
मां महिषासुर मर्दिनी का दरबार
Chaitra Navratri 2025 (हरीश साहू, कोरबा): 30 मार्च से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की शुरुआत हो चुकी है. माता रानी के दरबार में भक्तों का तांता लगने लगा है. इस मौके पर जानिए छत्तीसगढ़ में मौजूद महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर के बारे में. इस अनोखे मंदिर को लेकर खास मान्यता है. कोरबा जिला स्थित इस मंदिर में नवरात्रि के मौके पर मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
मां महिषासुर मर्दिनी का दरबार
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमिटर दूर और पाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महिषासुर मर्दिनी माता का मंदिर काफी विख्यात है.यह मंदिर 3 हजार फीट ऊपर पहाड़ों पर स्थित है.
महिषासुर का वध करने के बाद मां हुई विराजमान
मान्यता और जनश्रुतियों के मुताबिक माता रानी महिषासुर का वध करने के बाद यहां विराजमान हुई थीं. नवरात्रि का पर्व प्रारंभ होते ही माता रानी के दर्शन के लिए कोरबा जिले के अलावा दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. मंदिर में विराजित माता 12 भुजा वाली हैं और आसपास हनुमान, शंकर, शनिदेव का भी मंदिर है.
पहाड़ पर 5 तालाब
इसके अलावा पहाड़ के ऊपर 5 तालाब गर्गज, सुखी, केकड़ा, भूखी, सिंघी तालाब है. इसमें से 3 तालाबों का पानी कभी नहीं सूखता है. तालाब के होने से ठंडक भी महसूस होती है, जिसकी वजह से इसे दूसरा कश्मीर भी कहा जाता है.
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बिहार से हर साल पहुंचते हैं भक्त वीरेंद्र
मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि माता रानी की भक्ति करने में बहुत आनंद की प्राप्ति होती है. हर साल नवरात्रि के मौके पर सेवा करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. ऐसे ही एक श्रद्धालु हैं बिहार के रहने वाले वीरेंद्र चौहान. वह कई सालों से माता की सेवा करने के लिए नवरात्रि पर चैतुरगढ़ पहुंचते हैं.
9 दिनों तक भंडारा
हर साल नवरात्रि के मौके पर मंदिर ट्रस्ट संघ के द्वारा 9 दिनों तक भंडारे का आयोजन किया जाता है. ऐसे में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु इस भंडारा प्रसाद का आनंद लेते हैं. मंदिर परिसर के लोगों ने मंदिर की स्थापना, मान्यता और माता रानी की इस मंदिर में विराजने की महिमा को बताया है.
बता दें कि मां के मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक शंकर गुफा भी है, जो काफी चर्चित है और मंदिर के दर्शन के बाद सभी श्रद्धालु वहां गुफा में शंकर जी का दर्शन करने पहुंचते हैं.