रायपुर. राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो/एन्टी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB), छत्तीसगढ़, रायपुर ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के 182 करोड़ रुपए से अधिक के मैनपावर भुगतान घोटाले में कड़ा कदम उठाया है. इस बहुचर्चित मामले में ईओडब्ल्यू/एसीबी ने 18.10.2026 को CSMCL के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया (बी.आर. लोहिया) के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पूरक चालान पेश किया है. (CSMCL Manpower Scam Supplementary Chargesheet)
चालान में बताया गया है कि शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को लगभग 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान कराया गया. दुकानों के कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों की रकम दिए बिना फर्जी भुगतान अभिलेख तैयार कर यह राशि प्राप्त की गई. इस मामले में पूर्व में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर और विभिन्न मैनपावर एजेंसियों के संचालकों सहित 12 आरोपियों के विरुद्ध 18.05.2026 को पहला चालान प्रस्तुत किया जा चुका है. आगे की विवेचना और नए साक्ष्य मिलने पर यह पूरक चालान पेश किया गया है.
क्या थी अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका
अरुणपति त्रिपाठी 09.05.2019 से 13.05.2023 तक CSMCL के प्रबंध संचालक रहे, जिनके पास प्रशासनिक, वित्तीय और निविदा संबंधी सभी अधिकार थे. विवेचना में सामने आया कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में परिवर्तन किया गया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान कराकर उसका हिस्सा कमीशन के रूप में लेने की व्यवस्था लागू की गई. उनके कार्यकाल के दौरान पांचों एजेंसियों को कुल 1,52,39,77,666 रुपए (लगभग 152.40 करोड़ रुपए) का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिसमें ओवरटाइम (लगभग 82.66 करोड़ रुपए), बोनस (12.21 करोड़ रुपए), चार अतिरिक्त दिनों के कार्य (45.02 करोड़ रुपए) और सेवा शुल्क (12.51 करोड़ रुपए) शामिल हैं. एजेंसियों से नकद कमीशन एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने का काम सिद्धार्थ सिंघानिया करता था, जिसके अनुसार सभी एजेंसियों से मिलाकर लगभग 70 से 80 लाख रुपए प्रतिमाह कमीशन आता था. त्रिपाठी द्वारा 28 से 32 करोड़ रुपए नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं. उनके हिस्से की अवैध रकम में से लगभग 3 करोड़ रुपए प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जप्त किए गए हैं. अरुणपति त्रिपाठी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में हैं.
क्या थी बी.आर. लोहिया और मैनपावर एजेंसियों की भूमिका
बी.आर. लोहिया ‘ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड’ के संस्थापक थे और ‘अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड’ भी इसी समूह की कंपनी थी, जिसके सभी प्रमुख निर्णय उनके द्वारा लिए जाते थे. लोहिया के निर्देश पर कंपनी के सीए नीरज चौधरी द्वारा कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के बिल जारी किए गए, जिनका वास्तविक भुगतान कर्मचारियों को नहीं किया गया. ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड को 33,45,05,110 रुपए और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को 14,63,48,143 रुपए (कुल 48,08,53,253 रुपए) का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त हुआ, जिसमें से 38,31,76,541 रुपए अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में दिए गए थे.
ईडी ने क्या-क्या बरामद किया ?
29.11.2023 को लंबित बिल पारित कराने के एवज में तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को देने के लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपए का चेक भेजा गया था. बैंक से राशि निकालकर 60,000 रुपए खर्च के बाद शेष 28.80 लाख रुपए कमीशन के रूप में पहुंचाए जा रहे थे, जिसे ईडी की कार्रवाई के दौरान बरामद किया गया था. बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद बी.आर. लोहिया पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते उनके विरुद्ध फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी में पूरक चालान पेश किया गया है.
आंगड़िया नेटवर्क के जरिए रकम बाहर भेजने के साक्ष्य
जांच में यह भी सामने आया कि महमूद अहमद खान नामक व्यक्ति ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए नकद पहुंचाए थे, जो अरुणपति त्रिपाठी के बताए गए थे. पी. विजय कुमार एण्ड कंपनी के तत्कालीन पार्टनर निमेष चन्द्रकान्त पटेल ने इस रकम को मुंबई में श्रीजी इंटरप्राइजेज को देने और आगे हैदराबाद भेजे जाने की पुष्टि की है.
ये हैं वो पांच प्रमुख मैनपावर एजेंसियां
- सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
- प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
- अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
- ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड
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