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छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार मामले की अब CBI करेगी जांच

रायपुर. छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से जुड़े बाघ शिकार और तस्करी के मामलों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगा. राज्य सरकार ने इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए सहमति दे दी है. गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है.

सरकार ने कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल में 29 जून 2026 को दर्ज वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 5 जुलाई 2026 को दर्ज वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22108/01 की जांच के लिए दिल्ली पुलिस स्थापना के सदस्यों के अधिकार और क्षेत्राधिकार का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ में करने की सहमति दी है.

तीन बाघों की खाल बरामद, 9 आरोपी गिरफ्तार

जून-जुलाई 2026 के दौरान कांकेर, बीजापुर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़े इलाकों में तीन बाघों की खाल बरामद की गई थी. मामले में अब तक नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच में बाघों के पंजे और खाल की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. मामले में मिलीभगत के आरोप सामने आने के बाद वन विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है.

प्रारंभिक जांच में महाराष्ट्र पुलिस की विशेष शाखा के एक सिपाही और एक पुलिस मुखबिर की भूमिका सामने आने की बात भी कही गई है. इसके अलावा तस्करी के तार छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना तक जुड़े होने की जानकारी जांच में सामने आई है.

अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच होगी

मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े तारों को देखते हुए वन विभाग ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. विभाग ने गृह विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था. अब राज्य सरकार की सहमति मिलने के बाद सीबीआई जांच का रास्ता साफ हो गया है. जांच में बाघों के शिकार, खाल और पंजों की तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क तथा इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी.

गौरतलब है कि राज्य में बाघों की संख्या वर्तमान में 35 बताई जा रही है. ऐसे में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी के मामलों को लेकर वन विभाग के सामने संरक्षण की चुनौती भी बढ़ गई है.

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