CG News: छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों में धान खरीदी के दौरान सामने आए लाखों रुपये के धान घोटाले से जुड़े एक मामले में हाई कोर्ट ने समिति प्रबंधक को राहत देने से इनकार कर दिया है. दुर्ग जिले के कुम्हाली स्थित सेवा सहकारी समिति में धान और बारदानों की बड़ी कमी पाए जाने के मामले में दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया.
भौतिक सत्यापन में मिली बड़ी गड़बड़ी
मामला उस समय सामने आया जब खाद्य एवं सहकारिता विभाग ने 23 अप्रैल 2026 को समिति का भौतिक सत्यापन किया. जांच के दौरान 690.70 क्विंटल धान और 3,057 बारदानों की कमी दर्ज की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 23.54 लाख रुपये बताई गई. इस आधार पर समिति प्रबंधक अतुल कुमार वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.
याचिकाकर्ता ने रखे ये तर्क
हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि धान की कमी किसी गबन या अनियमितता का परिणाम नहीं है. उनके अनुसार लंबे समय तक धान का उठाव नहीं होने से गोदामों में कीटों का प्रकोप बढ़ गया, चूहों ने भी काफी मात्रा में धान को नुकसान पहुंचाया और मौसम की परिस्थितियों के कारण धान में नमी कम होने से उसका वजन घट गया. इसके अलावा खराब गुणवत्ता वाले बारदानों से भी अनाज के रिसाव की बात कही गई.
कोर्ट ने जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने इन तर्कों को जांच के स्तर पर परखे जाने योग्य बताते हुए एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि यह जांच एजेंसियों को तय करना है कि धान की कमी प्राकृतिक कारणों से हुई या फिर इसमें लापरवाही अथवा आर्थिक गड़बड़ी की भूमिका रही है.
अग्रिम जमानत के लिए रास्ता खुला
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मामले को केवल अनुबंध संबंधी विवाद बताकर प्रारंभिक चरण में आपराधिक जांच को नहीं रोका जा सकता. हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता देते हुए कहा कि वह कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपना सकता है.
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