CJI Surya Kant Bench: सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में होने वाली सुनवाई के वीडियो और ऑडियो के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से इसको लेकर जवाब भी मांगा है.कोर्ट ने पूछा कि अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है? कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित नियमों में उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी होना चाहिए.
शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया. उन्होंने बताया अब तक जो सुझाव मिले हैं उन पर विचार किया जा रहा है.
इस दौरान अदालत ने चिंता जताई कि पहले से मौजूद निर्देशों के बावजूद सुनवाई के वीडियो निकालकर उन्हें एडिट किया जा रहा है. जिनको सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है. पीठ ने कहा कि केवल रोक लगाने से काम नहीं चलेगा. बल्कि, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका भी तय करना होगा.
प्रशांत भूषण ने दिया वीडियो सुरक्षित रखने का सुझाव
सुनवाई में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के मूल वीडियो आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि इन वीडियो पर डिजिटल वॉटरमार्क और क्रिप्टोग्राफिक साइनिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे असली रिकॉर्डिंग और उसमें छेड़छाड़ करके बनाए गए वीडियो के बीच अंतर करना आसान होगा.
जस्टिस बागची ने कहा कि वीडियो के इस्तेमाल की प्रकृति और उद्देश्य को समझना जरूरी है. वहीं, तुषार मेहता ने कहा कि कई यूट्यूब चैनल ऐसे वीडियो के जरिए कमाई भी करते हैं. ऐसे में इनके इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए.
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