Election Commission Form-7 Guidelines: दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम हटाने से जुड़ी आपत्तियों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब फॉर्म-7 जमा करने की लिमिट चुनाव आयोग की तरफ से फिक्स कर दी गई है. इस फैसले के पीछे की वजह वोटर लिस्ट में मौजूद गलत या बेबुनियाद आपत्तियों के जरिए नाम हटाने की कोशिशों पर रोक लगाना है.
चुनाव आयोग के नए निर्देशों के मुताबिक, वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण या दावे-आपत्तियों की तय अवधि के दौरान कोई व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म-7 जमा कर सकेगा. यह सीमा ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से आवेदन करने पर लागू होग.
फॉर्म-7 का क्या होता है काम?
फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है. इसके जरिए मृत व्यक्ति, दूसरी जगह स्थायी रूप से जा चुके मतदाता को लेकर आपत्ति उठाई जा सकती है. हालांकि, सिर्फ फॉर्म जमा कर देने से किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हट जाता है. उसके लिए भी पूरी प्रक्रिया होती है.
आपत्ति पर सुनवाई के बाद ही होगा फैसला
नए निर्देशों में आवेदन की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया है. फॉर्म-7 मिलने के बाद निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी ERO आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाएगा. अधिकारी को हर आवेदन से संबंधित बयान, दलीलें और सबूत अलग-अलग दर्ज करने होंगे.
इसके बाद आपत्ति की वैधता की जांच की जाएगी. जिस मतदाता के नाम को हटाने की मांग की गई है, उसे भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा. सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही नियमों के अनुसार फैसला लिया जाएगा.
CJP प्रदर्शन के बीच क्यों अहम है यह फैसला?
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर देश में राजनीतिक बहस जारी है. इसी बीच CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था. संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है.
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