सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग का फैसला, फॉर्म-6 से हटाया गया SIR घोषणा पत्र

Election Commission of India: चुनाव आयोग ने नए वोटर्स के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी घोषणा को अलग कर दिया है.
CEC Gyanesh Kumar

CEC ज्ञानेश कुमार

Election Commission of India: देशभर में इस समय चुनाव आयोग और उसके काम करने के तरीके को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. लगभग पूरा विपक्ष चुनाव आयोग और मुख्‍य चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. पिछले एक महीने के दौरान कई बार विपक्ष ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया है. इन सब के बीच अब चुनाव आयोग ने अपने एक फैसले को पलट दिया है.

वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा बदलाव किया है. आयोग ने नए वोटर्स के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी घोषणा को अलग कर दिया है. अब मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फॉर्म-6 और SIR से संबंधित घोषणा अलग-अलग भरनी होगी.

चुनाव आयोग ने का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. यही वजह है कि इस फैसले की चर्चा ज्यादा हो रही है. 

पहले क्‍या था न‍ियम?

दरअसल, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक अतिरिक्त घोषणा शामिल की थी. इसमें आवेदकों से पूछा जाता था कि क्या उनका नाम पिछली SIR के दौरान जारी मतदाता सूची में था? अगर उनका नाम नहीं था, तो क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में दर्ज था? इस जानकारी को देना अनिवार्य किया गया था. इसके बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती थी.

इसी को लेकर चुनाव आयोग के भीतर आए थे मतभेद

इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद सामने आए थे. दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार चुनाव आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास है. ऐसे में बिना नियमों में संशोधन किए इसमें अतिरिक्त जानकारी मांगना उचित नहीं है.

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