Cockroach Janta Party Protest: नीट पेपर लीक मामले और उसके बाद हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में छात्रों और अपराध में शामिल लोगों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता है. अदालत ने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा दी है. इसके साथ ही जिन लोगों ने पेपर लीक जैसी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया है, उनके मामलों की अलग-अलग तरीके से जांच और सुनवाई होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यदि किसी छात्र की सीधे तौर पर किसी गलत काम में भूमिका साबित नहीं होती, तो उसे केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. वहीं, पेपर लीक की साजिश रचने वाले या उसमें सहयोग करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई आवश्यक है.
एसाईटी गठित करने के आदेश दे सकता है कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट इस बात का पता लगाने में भी जुटा है कि पुलिसकर्मियों पर हमले छात्रों ने किए थे? इसके अलावा ये भी पता लगाने की कोशिश है कि छात्रों की भीड़ में घुस आए शरारती तत्वों ने पुलिसकर्मियों ने हमला किया था. कुल मिलाकर अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि पुलिसवालों पर हमला किसने किया था. ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों सुप्रीम कोर्ट इस बात का पता लगाने के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश भी दे सकती है.
सख्ती करने वाले जवानों को न बचाएं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अगर कोई पुलिस अधिकारी जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है, तो उसे बेवजह बचाया नहीं जाना चाहिए. कुल मिलाकर कोर्ट ने ऐसे पुलिस वालों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी को बचाया जाए. कोर्ट ने जांच करने वाली टीम को निष्पक्ष जांच करने की बात कही है.
कोर्ट ने क्या-क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है. इसलिए किसी भी निर्णय का प्रभाव ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर नहीं पड़ना चाहिए. अदालत ने संकेत दिया कि न्याय प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि निर्दोष छात्रों को परेशानी न हो और दोषियों को उचित दंड मिल सके.
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