Supreme Court Footpath Order: देशभर में कई ऐसे शहर हैं जहां अतिक्रमण के कारण लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है. इस जाम में आम से लेकर खास कोई भी फंस सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट के आसपास फुटपाथों पर भी इसी तरह का आलम है. जिसको लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने साफ कहा है कि लोगों की सुरक्षा के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. गर 25 नवंबर 2026 तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो जज दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर धरने पर बैठ सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि केवल बैठकें करने और कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा. प्रशासन को जमीन पर बदलाव करके दिखाना होगा. अदालत ने कहा कि जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को भी तलब किया जा सकता है.
पैदल चलना भी अधिकार का हिस्सा
अदालत ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(d) से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है. फुटपाथ पर कब्जा होने या सड़क पार करने की उचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है. इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है. कोर्ट का कहना है कि लोगों को सुरक्षित रास्ता देना प्रशासन की जिम्मेदारी है.
देशभर में फुटपाथों को लेकर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ बनाने पर जोर दिया है. सड़क निर्माण के साथ फुटपाथ की व्यवस्था भी जरूरी होनी चाहिए. रेहड़ी-पटरी, अवैध पार्किंग, कचरे और दूसरी बाधाओं के कारण पैदल चलने वालों को परेशानी नहीं होनी चाहिए.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से फुटपाथों की निगरानी के लिए केंद्रीय स्तर पर व्यवस्था बनाने को भी कहा है. शुरुआती चरण में पांच शहरों में फुटपाथ निर्माण से जुड़ी पायलट योजना शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
फुटपाथों का निर्माण इंडियन रोड्स कांग्रेस के दिशा-निर्देशों के मुताबिक करने पर जोर दिया गया है. इनमें फिसलन से बचाने वाली सतह, व्हीलचेयर के लिए रैंप और बाधा रहित रास्ते जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
ये भी पढ़ें:रूस से तेल खरीदने पर भारत पर नहीं लगेगा टैरिफ, ट्रंप ने अपने ही फैसले पर फिर मारी पलटी
