MP News: दस साल बाद फिर से मंडला सीट पर आमने-सामने होंगे फग्गन सिंह कुलस्ते और ओंकार सिंह मरकाम

Lok Sabha Election 2024: दोनों नेता अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं. दोनों का राजनीतिक सफर शानदार रहा है. जहां एक ओर कुलस्ते मंडला से छह बार के सांसद रहे और केंद्र में मंत्री रहे. वहीं मरकाम डिंडौरी से चार बार के विधायक हैं

Faggan Singh Kulaste and Omkar Singh Markam

मंडला संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते और कांग्रेस प्रत्याशी ओंकार सिंह मरकाम के बीच मुकाबला कड़ा होने वाला है

भोपाल: मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीट में से एक मंडला लोकसभा सीट भी है. मंडला लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति(scheduled tribes) के लिए रिजर्व है. मंडला सीट में दो जिले आते हैं इनमें मंडला और डिंडौरी शामिल हैं. इन दोनों जिलों के अलावा चार जिलों की आठ विधानसभा सीट इसमें शामिल है. डिंडौरी जिले की शाहपुरा और डिंडौरी विधानसभा सीट; मंडला जिले की बिछिया, निवास और मंडला विधानसभा; सिवनी जिले की केवलारी और लखनादौन विधानसभा सीट और नरसिंहपुर सिंह जिले की गोटेगांव सीट शामिल है.

दोनों जिलों को मिलाकर मंडला लोकसभा सीट पर लगभग 10 लाख लोग अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं. इससे भी रोचक बात ये है कि यहां पुरुष वोटरों से ज्यादा महिला वोटर हैं. इस सीट पर सीट महिला वोटर निर्णायक सिद्ध होती हैं.

बीजेपी ने इस बार फिर से फग्गन सिंह कुलस्ते पर भरोसा जताया है. वहीं कांग्रेस ने ओंकार सिंह मरकाम को अपना उम्मीदवार बनाया है. आइए जानते दोनों के राजनीतिक सफर के बारे में..

फग्गन सिंह कुलस्ते – मंडला से छह बार के सांसद

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बीजेपी के आदिवासी चेहरे फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार हैं. मंडला लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके हैं. बीजेपी ने फिर से आमचुनाव 2024 के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. फग्गन सिंह कुलस्ते का राजनीतिक करियर बहुत बड़ा रहा है. सार्वजनिक राजनीति के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी काम किए हैं.

साल 1990 में निवास विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर कुलस्ते विधायक बने. यही से राजनीतिक सफर की शुरुआत होती है. साल 2009 से 2014 के समय को छोड़ दिया जाए तो कुलस्ते 1996 से लेकर वर्तमान तक मंडला से सांसद हैं. फग्गन सिंह कुलस्ते साल 1996 में जब लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे तो उन्हें कई अलग-अलग समितियों का सदस्य बनाया गया. इसके बाद साल 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में फिर कुलस्ते ने जीत दर्ज की.

साल 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में कुलस्ते ने फिर से मंडला सीट जीत ली. इस बार फग्गन सिंह कुलस्ते को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया. पहले उन्हें केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री और फिर केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री बनाया गया. साल 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने लगातार चौथी बार अपना उम्मीदवार बनाया और कुलस्ते ने फिर से मंडला सीट जीत ली. साल 2009 के आम चुनाव में कुलस्ते को अपनी सीट गवांनी पड़ी. इस बार विजय कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम की हुई.

साल 2012 में फग्गन सिंह कुलस्ते राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. लेकिन साल 2014 के आम चुनाव के लिए फिर से बीजेपी ने उन्हें मंडला सीट से अपना उम्मीदवार बना दिया. इस बार कुलस्ते को केंद्र में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का जिम्मा दिया गया. साल 2019 में हुए सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के लिए फिर से चुना गया. केंद्र सरकार में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा दिया गया.

साल 2023 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मंडला जिले की निवास विधानसभा सीट से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया. इस विधानसभा चुनाव में कुलस्ते की हार हुई. कांग्रेस के चैनसिंह वरकड़े ने चुनाव जीता. चैन सिंह को 99 हजार 644 वोट मिले वहीं कुलस्ते को 89 हजार 912 वोट मिले. दोनों के बीच जीत का अंतर करीब दस हजार रहा.

विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद मंडला लोकसभा सीट से कुलस्ते को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया. फग्गन सिंह कुलस्ते की मंडला जिले पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. मंडला सीट पर नजर डाले तो मालूम पड़ता है कि कुलस्ते के पास मजबूत जनाधार दिखता है. साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में कुलस्ते ने अपने करीबी प्रतिद्वंदी कांग्रेस के कमल सिंह मरावी को एक लाख से ज्यादा वोट से हराया था.

फग्गन सिंह कुलस्ते ने बीजेपी के संगठन स्तर कई सारी जिम्मेदारी को निभाया. इनमें अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष रहे, बीजेपी के प्रदेश स्तर के महासचिव पद पर रहे और बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे.

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ओंकार सिंह मरकाम – डिंडौरी से चार बार के विधायक

संपत्ति – एक करोड़ रुपये+
आपराधिक रिकॉर्ड – शून्य (0)

कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए मंडला सीट से ओंकार सिंह मरकाम को उम्मीदवार बनाया है. मरकाम डिंडौरी विधानसभा सीट से चार बार के विधायक हैं. संगठन और सार्वजनिक दोनों स्तर पर काम करने वाले मरकाम की डिंडौरी जिले पर अच्छी पकड़ है.

ओंकार सिंह मरकाम ने अपना पहला विधानसभा चुनाव साल 2008 में लड़ा और जीत दर्ज की. इसके बाद 2013, 2018 और 2023 का विधानसभा चुनाव डिंडौरी सीट से लड़ा और जीता. साल 2018 में एमपी में कांग्रेस की सरकार में मरकाम को जनजातीय कार्य विभाग का जिम्मा दिया गया और कैबिनेट स्तर का मंत्री बनाया गया.

इससे पहले भी मरकाम ने मंडला सीट से चुनाव लड़ा था. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मरकाम को उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे हार गए. रोचक बात ये है कि वे फग्गन सिंह कुलस्ते से ही एक लाख वोट से चुनाव हारे थे.

संगठन की बात करें तो ओंकार सिंह मरकाम कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं. कांग्रेस की यूथ विंग के सचिव भी रह चुके हैं. राहुल ब्रिगेड टीम में रहे हैं और डिंडौरी कांग्रेस जिला अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं.

साल 2023 में हुए चुनाव में मरकाम ने अपने करीबी प्रतिद्वंदी बीजेपी के पंकज टेकाम को हराया था. इस विधानसभा चुनाव में मरकाम को 92 हजार 962 और बीजेपी को 80 हजार 847 वोट मिले. दोनों के बीच जीत का अंतर करीब 12 हजार रहा.

फग्गन सिंह कुलस्ते बनाम ओंकार सिंह मरकाम

दोनों नेता अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं. दोनों का राजनीतिक सफर शानदार रहा है. जहां एक ओर कुलस्ते मंडला से छह बार के सांसद रहे और केंद्र में मंत्री रहे. वहीं मरकाम डिंडौरी से चार बार के विधायक हैं और कांग्रेस की सबसे अहम केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं. जनजाति बाहुल्य जिलों से आने वाले दोनों नेताओं का अपने-अपने जिलों में जनाधार भी है.

दोनों नेता मंडला लोकसभा सीट पर आमने-सामने आ चुके हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में फग्गन सिंह कुलस्ते ने जीत दर्ज की थी. कुलस्ते को पांच लाख, 85 हजार, 720 वोट मिले थे वहीं मरकाम को चार लाख, 75 हजार, 251 वोट मिले थे.

मंडला सीट का राजनीतिक इतिहास

इस सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी दिखता है. कुल 46 साल तक कांग्रेस का राज रहा. पहली बार इस सीट पर साल 1977 में जनता पार्टी का सांसद जीतकर आया था जो केवल तीन साल ही सांसद रहा. इस सीट से सबसे ज्यादा छह बार यानी साल 1996, 1998,1999, 2004, 2014, और 2019 में फग्गन सिंह कुलस्ते सांसद रहे. इसके बाद पांच बार यानी साल 1952,1957, 1962, 1967 और 1971 में कांग्रेस के मंगरु गनु उइके सांसद रहे. कांग्रेस के ही मोहन लाल झिकराम तीन बार यानी साल 1984, 1989 और 1991 में सांसद रहे. आखिरी बार कांग्रेस के बसोरी लाल मसराम ने साल 2009 का चुनाव जीता था.

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