Lok Sabha Election 2024: देश की राजनीति की दशा और दिशा तय करेगी ये 4 जातियां, जानें क्या हैं इनके मुद्दे

स्वस्थ लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका काफी अहम होती है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश में 18-19 आयु वर्ग के 1.85 करोड़ युवा मतदाता हैं.  
प्रतीकात्मक तस्वीर

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Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. चुनाव आयोग ने पिछले दिनों चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया था. इस चुनाव में राजनीतिक पार्टियां कई मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है. वहीं जब विपक्ष की ओर से जाति आधारित राजनीति से सरकार को घेरने की कोशिश होती है तब पीएम मोदी इसका काट ले आते हैं. पीएम मोदी ने जाति की नई परिभाषा गढ़ दी है.  जातिगत राजनीति के इर्द-गिर्द 2024 की लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने के विपक्ष के प्रयासों पर निशाना साधते हुए, पीएम मोदी ने हाल ही में बताया कि वह केवल चार जातियों – महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों – में विश्वास करते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि इसमें भाजपा की जीत है.

याद करिए जब पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे सामने आए थे तो पीएम मोदी ने कहा था, “मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लोगों ने हम पर अपना प्यार बरसाया है. इन चुनावों में देश के लोगों को विभिन्न जातियों में विभाजित करने के कई प्रयास हुए. लेकिन मैं कहता रहा कि मैं उनमें से केवल चार में विश्वास करता हूं – नारी शक्ति, युवा शक्ति, हमारे किसान और गरीब. इन चारों को सशक्त बनाकर ही देश विकास कर सकता है.”

बता दें कि लोकसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही देश में महासमर की शुरुआत हो गई है. एक ओर जहां विपक्ष मंहगाई और जाति को मुद्दा बनाकर केंद्र से मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कर रहा है, वहीं बीजेपी अब की बार ‘400 पार’ का नारा दे रही है. पीएम मोदी खुद बीजेपी के प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं. लगभग हर रैली में पीएम नारी शक्ति, युवा शक्ति, हमारे किसान और गरीब के बारे में बात करते नजर आ जाते हैं. आइये विस्तार से जानते हैं कि इनकी कितनी संख्या है और लोकसभा चुनाव 2024 में इनके मुद्दे क्या हैं…

नारी शक्ति

चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक,  देश के 12 राज्यों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है. अगर वोटरों की बात करें तो देशभर में कुल 47.1 करोड़ महिलाएं मतदाता सूची में रजिस्टर्ड हैं. वहीं लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 948 महिलाओं का है जो चुनावी चक्र में महिलाओं की भागीदारी का ‘बहुत अच्छा संकेत’ है.

बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने वोट किया था.  लोकसभा चुनाव 2019 के समय  67.2 फीसदी महिला मतदाताओं ने वोट डाले थे. देश की आधी आबादी को सशक्तिकरण जरुरी है.

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युवा शक्ति

बता दें कि किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका काफी अहम होती है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश में 18-19 आयु वर्ग के 1.85 करोड़ युवा मतदाता हैं.  पिछली बार यह आंकड़ा 1.5 करोड़ था. 18-19 और 20-29 आयु वर्ग के 2 करोड़ से अधिक युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ा गया है.  वहीं युवाओं के मुद्दे हैं कम लागत में उच्च शिक्षा की सुविधाएं. शोध के लिए सरकारी मदद. उद्यमिता के लिए कर्ज की उपलब्धता.

किसान

हाल के सालों में किसानों के बड़े-बड़े धरने एवं रैलियां हुईं, जिनमें लाखों किसानों ने भाग लिया. किसानों का शोषण, कृषि उपज का उचित दाम न मिलना, किसानों पर बढ़ता कर्ज, किसानों पर बढ़ते हुए शुल्क, बिजली के बढ़ते बिल आदि उनके प्रमुख मुद्दे हैं, लेकिन किसानों की प्रमुख मांगें पूरी होना तो दूर उनकी हालत और खराब होती गई. इस बार के लोकसभा चुनाव में भी किसान इन्हीं मुद्दों पर वोट कर सकते हैं.

गरीब

देश का सबसे कमजोर वर्ग है गरीब, चुनाव चाहे विधानसभा का हो या राज्यसभा का गरीबों का एक ही मुद्दा होता है सरकार हमें रोजगार, सस्ती स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा और पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराए.लेकिन हर बार उनकी आशा को ठेस ही पहुंचती है. मोदी सरकार ने देश के गरीबों के लिए कई योजनाओं की शुरुआत तो की है लेकिन उसे धरातल पर उतारने में समय लग रहा है. बता दें कि  भारत की कुल आबादी में से 16.1 फीसदी लोग गरीब हैं, जिन्‍हें सरकार की मदद की जरूरत है.

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