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Madhya Pradesh में स्वामित्व योजना के पहले दिन ही नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री, पटवारियों का विरोध बना वजह

Patwari

पटवारी

Swamitva Yojana Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को उनके मकान और भूखंड का मालिकाना हक देने वाली स्वामित्व योजना की शुरुआत ही विवाद में घिर गई है. राजधानी भोपाल में हजारों निःशुल्क रजिस्ट्रियों का लक्ष्य था, पंचायत स्तर पर शिविर भी लगाए गए, लेकिन पटवारियों के विरोध के चलते पहले दिन एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी. पटवारी संघ को सबसे बड़ी आपत्ति रजिस्ट्री दस्तावेज में उन्हें निष्पादक बनाए जाने पर है. पूरे प्रदेश में भी यही स्थिति बनी हुई है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मध्यप्रदेश में ग्रामीण आबादी को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक दिलाने के लिए स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की गई. भोपाल जिले में 41 हजार 726 रजिस्ट्रियां की जानी हैं. पहले दिन करीब 6 हजार रजिस्ट्रियों का लक्ष्य रखा गया था. पंचायतों में शिविर लगाए गए, लेकिन पटवारियों के विरोध के कारण रजिस्ट्री का काम शुरू नहीं हो सका.

भोपाल जिले में करीब 250 पटवारी हैं, जिनमें से 150 को स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की जिम्मेदारी दी गई है. एक पटवारी को करीब 40 रजिस्ट्रियां कराने का काम सौंपा गया है. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और इसमें पटवारी की आईडी का इस्तेमाल किया जाना है. यहीं से पटवारियों की आपत्ति शुरू होती है.

पटवारी संघ क्यों कर रहा विरोध?

पटवारी संघ का कहना है कि रजिस्ट्री दस्तावेज में उन्हें निष्पादक बनाया जा रहा है, जबकि संपत्ति से जुड़े भविष्य के किसी विवाद में यह व्यवस्था उन्हें कानूनी उलझन में डाल सकती है. संघ की मांग है कि दस्तावेज में व्यक्तिगत रूप से पटवारी का नाम दर्ज करने के बजाय मध्यप्रदेश शासन का नाम दर्ज किया जाए. संघ ने साफ किया है कि निष्पादक की भूमिका से हटाए जाने तक पटवारी इस काम से अलग रहेंगे.

वहीं इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने सरकार पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं और भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है. दोनों दलों के प्रवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे हैं.

अब सवाल यह है कि जिन ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए यह प्रक्रिया शुरू की गई है, वह कब तक पटरी पर आएगी. एक तरफ सरकार के सामने बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी कानूनी जिम्मेदारी को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है.

स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया का मकसद जमीन और मकान से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट करना है. लेकिन शुरुआत में ही निष्पादक की भूमिका को लेकर पटवारियों और सरकार के बीच खींचतान सामने आ गई है. अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद का समाधान किस तरह करती है और हजारों रजिस्ट्रियों का काम कब शुरू हो पाता है.

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