What is the Dairy Plus scheme: किसान खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय कमाने के लिए पशुपालन का सहारा ले रहे हैं. दुधारू पशुओं को पालकर दूध उत्पादन करके लाभ कमा रहे हैं. मध्य प्रदेश सरकार भी डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है. मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है. यदि आप भी इस स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं तो जानिए कितनी लागत आएगी? कहां आवेदन कर सकते हैं? क्या-क्या प्रावधान बताए गए हैं. इसके बारे में सारी जानकारी जान लीजिए.
क्या है डेयरी प्लस योजना?
मध्य प्रदेश सरकार की शानदार योजनाओं में से एक है. इसके तहत सभी वर्ग के पशुपालक आते हैं. अनुदान में दो मुर्रा भैंसें दी जाती हैं. इसका शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के बुधनी से 29 सितंबर 2022 को शुभारंभ किया था. ये योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू है.
इस योजना का उद्देश्य क्या है?
डेयरी प्लस योजना का उद्देश्य प्रदेश में उन्नत पशुओं की नस्लों का बढ़ावा देना है. मध्य प्रदेश में दूध के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए. इसके साथ ही छोटे और सीमांत पशुपालकों को उच्च उत्पादन क्षमता वाले दुधारू पशु मिल सकें.
स्कीम के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत पशुपालकों को दो दुधारू भैंसें अनुदान (सब्सिडी) दी जाती हैं. जो प्रतिदिन 8 से 10 लीटर तक दूध देती हैं. दोनों भैंसों की लागत करीब 2.95 लाख रुपये आती है. इसके सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 50 फीसदी सब्सिडी देती है. वहीं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. वहीं, 25 फीसदी हिस्सा हितग्राही को देना होता है.
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कैसे और कहां आवेदन करें?
पशुपालक मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ उठाने के लिए जिला पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय प्रभारी और पशु चिकित्सा उपसंचालक के पास आवेदन कर सकते हैं. वहीं, आवेदन के प्रोसेस की बात करें तो हितग्राहियों का ग्राम सभा में अनुमोदन होना चाहिए. ग्राम सभा से अनुमोदित हितग्राहियों का जनपद पंचायत की सभा में अप्रूवल मिलना चाहिए. जनपद पंचायत के अप्रूवल के बाद जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति की मीटिंग में अप्रूवल मिलना चाहिए.
