भोपाल: “नौकरी करो या घर बसाओ. दोनों एक साथ नहीं हो सकता.” ये लाइन आज MP के हजारों ग्राम रोजगार सहायकों की हकीकत बन गई है. खासकर महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं. शादी दूसरे जिले में हुई. नौकरी अपनी पंचायत में अटकी है. न तबादला नीति है. न सुनवाई. बस फाइल और वादे.
ऑफिस दूर होने के चलते टूट रहे रिश्ते
सागर में पदस्थ मोना राजपूत की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. शादी जबलपुर में हुई. लेकिन ड्यूटी सागर में. पति बोलते हैं “तबादला नहीं होता तो नौकरी छोड़ दो. मजदूरी कर लेंगे.” सैकड़ों किलोमीटर की दूरी. महीने में एक बार मिलना. फोन पर झगड़े. और अब रिश्ता टूटने की नौबत. मोना अकेली नहीं है. प्रदेश भर में ऐसी सैकड़ों महिलाएं हैं जिनकी मैरिड लाइफ इस एक तबादले की वजह से दांव पर लगी है.दिक्कत साफ है. पंचायत सचिवों के तबादले होते हैं. सहायक सचिवों की फाइल चलती है. लेकिन ग्राम रोजगार सहायक 10-12 साल से एक ही जगह सड़ रहे हैं. न अंतरजिला ट्रांसफर. न ब्लॉक बदलने की सुविधा. सरकार ने 28 जून 2023 को खुद कहा था कि ग्राम रोजगार सहायकों की तबादला प्रक्रिया पंचायत सचिवों जैसी होगी.
परिषद की गाइडलाइन कागजों तक सीमित
24 जून 2025 को परिषद ने गाइडलाइन भी दी कि 3 साल बाद उसी जिले में स्थान परिवर्तन हो सकता है. लेकिन कागज पर ही रह गया. जमीन पर कुछ नहीं.परिणाम सामने है. कई महिलाओं का तलाक हो चुका है. कई परिवार टूटने वाले हैं. बच्चे मां के बिना. पति पत्नी साल भर दूर. त्योहार अकेले. बीमारी में कोई साथ नहीं. कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने अब सीधे अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है.
ये है संगठन की मांग
31 जुलाई 2026 को संगठन ने भी मांग रखी थी कि महिला कर्मचारियों को मानवीय आधार पर पति या ससुराल वाले जिले में भेजा जाए. समिति का कहना है कि पुरानी पंचायत से अनुबंध खत्म करके नई पंचायत में नया अनुबंध किया जा सकता है.
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