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Bhopal: बड़े तालाब किनारे अतिक्रमण पर NGT ने दिखाई सख्‍ती, प्रशासन को कार्रवाई के लिए दिया 21 दिनों का अल्‍टीमेटम

NGT takes a tough stance on encroachment

अतिक्रमण पर NGT ने दिखाई सख्‍ती

Bhopal News: भोपाल के बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है. ट्रिब्यूनल ने एफटीएल से 50 मीटर दायरे और बफर जोन में शेष 72 अतिक्रमणों को तीन सप्ताह के भीतर हटाने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है. एनजीटी ने स्पष्ट किया कि तय समय में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी.

वैज्ञानिक सीमांकन कराने के निर्देश

एनजीटी ने भोज वेटलैंड संरक्षण के तहत कलियासोत और केरवा जलाशयों का वैज्ञानिक सीमांकन जल्द पूरा कराने के निर्देश भी दिए हैं. प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी कर शपथपत्र के साथ विस्तृत प्रतिवेदन ट्रिब्यूनल में पेश करना होगा. ट्रिब्यूनल ने कहा कि वेटलैंड संरक्षण से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी.

117 अतिक्रमण में 72 अब भी बाकी

भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि सात गांवों के सर्वे में बड़े तालाब के 50 मीटर बफर जोन में 117 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे. इनमें से 72 अतिक्रमण अब भी नहीं हटाए गए हैं. याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों के बावजूद वेटलैंड और एफटीएल क्षेत्र में लगातार नए कब्जे हो रहे हैं.

जल गुणवत्ता और अवैध गतिविधियों पर चिंता

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बड़े तालाब, कलियासोत और केरवा का वैज्ञानिक सीमांकन अभी अधूरा है. साथ ही वेटलैंड के आसपास खेती में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशकों से जल प्रदूषण बढ़ने और पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई. ट्रिब्यूनल को यह भी बताया गया कि वेटलैंड क्षेत्र में अवैध मड रेसिंग और वाहन रेसिंग के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निगरानी बढ़ाई गई है. करीब 150 हेक्टेयर में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन के संरक्षण का मुद्दा भी सुनवाई में उठा.

प्रशासन ने मांगा अतिरिक्त समय

प्रशासन की ओर से टीटी नगर एसडीएम ने बताया कि कई अतिक्रमण पहले ही हटाए जा चुके हैं. शेष मामलों में पुलिस बल की कमी और कुछ प्रकरणों में हाई कोर्ट से मिले अंतरिम स्थगन आदेश के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है. प्रशासन ने बारिश का दौर खत्म होने के बाद बाकी अतिक्रमण हटाने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया.

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