जल जीवन मिशन पर CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, राष्ट्रीय औसत से एमपी पीछे, सार्वजनिक संस्थानों में भी जलापूर्ति अधूरी

MP News: रिपोर्ट में कहा गया है कि कई योजनाएं हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन के बिना स्वीकृत की गईं. जल स्रोतों की उपलब्धता नहीं होने पर बाद में कई बहु-ग्राम योजनाओं को एकल ग्राम योजनाओं में बदलना पड़ा, जिससे अतिरिक्त खर्च हुआ.
Major revelation in CAG report regarding Jal Jeevan Mission

जल जीवन मिशन को लेकर कैग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की प्रदर्शन लेखापरीक्षा रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आई हैं. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 तक राज्य में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका. करीब 1.11 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 60.90 लाख परिवारों को ही कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराए जा सके, जबकि 13 लाख से अधिक परिवारों के पास पहले से नल कनेक्शन थे. इसके बावजूद राज्य की कुल कवरेज 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत से काफी कम है.

रिपोर्ट में क्या बताया गया है?

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई योजनाएं हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन के बिना स्वीकृत की गईं. जल स्रोतों की उपलब्धता नहीं होने पर बाद में कई बहु-ग्राम योजनाओं को एकल ग्राम योजनाओं में बदलना पड़ा, जिससे अतिरिक्त खर्च हुआ. दिसंबर 2024 तक केवल 27 प्रतिशत ग्राम जल योजनाएं और 59 प्रतिशत बहु-ग्राम परियोजनाएं ही पूरी हो सकीं.

CAG ने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर निधियों का उपयोग नहीं होने से केंद्रीय अनुदान का पूरा लाभ नहीं मिल सका तथा राज्यांश के आवंटन में भी कमी रही. जल शक्ति मंत्रालय के पोर्टल पर 11.94 लाख घरेलू नल कनेक्शन ऐसे गांवों में दर्ज पाए गए, जहां योजनाएं पूरी नहीं हुई थीं या वास्तविक लाभार्थियों तक जलापूर्ति नहीं पहुंची थी.

सार्वजनिक संस्थानों में भी जलापूर्ति अधूरी

रिपोर्ट में सार्वजनिक संस्थानों तक नल जल पहुंचाने के दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं. 8,985 आंगनबाड़ी केंद्रों में केवल 5,602 (62.3%), 14,480 विद्यालयों में 10,050 (69.4%), 1,166 ग्राम पंचायत भवनों में 499 (42.8%) तथा 640 स्वास्थ्य केंद्रों में केवल 339 (53%) संस्थानों तक ही नल जल सुविधा उपलब्ध थी. 100 दिवसीय अभियान के बावजूद कई स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और स्वास्थ्य केंद्र सुरक्षित पेयजल सुविधा से वंचित रहे.

जल गुणवत्ता परीक्षण में भी गंभीर कमियां सामने आईं. कई जिलों में यूरेनियम की पहचान होने के बावजूद उसका नियमित परीक्षण नहीं किया गया और अनेक स्थानों से पानी के नमूने प्रयोगशालाओं तक भेजे ही नहीं गए. जल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं में निर्धारित मानकों के अनुरूप परीक्षण भी नहीं हुए.

मानव संसाधन विकास के मोर्चे पर प्रदर्शन कमजोर

मानव संसाधन विकास के मोर्चे पर भी प्रदर्शन कमजोर रहा. कौशल विकास कार्यक्रम में 50 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य था, लेकिन केवल 11 हजार (22%) लोगों को ही प्रशिक्षण दिया गया. वहीं, स्वीकृत 17 करोड़ रुपये में से केवल 4.02 करोड़ रुपये (23%) ही खर्च किए गए, जिससे ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर भी असर पड़ा.

रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के बारे में अहम तथ्य

  • 1.11 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 60.90 लाख को नल कनेक्शन.
  • राज्य की कवरेज 69%, जबकि राष्ट्रीय औसत 80% है.
  • हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन के बिना योजनाएं स्वीकृत.
  • केवल 27% ग्राम योजनाएं और 59% बहु-ग्राम परियोजनाएं पूरी.
  • केंद्रीय निधि और राज्यांश के उपयोग में कमी.
  • 11.94 लाख कनेक्शन अधूरी योजनाओं के बावजूद पोर्टल पर दर्ज.
  • जल गुणवत्ता परीक्षण और यूरेनियम जांच में गंभीर खामियां.
  • 50 हजार के लक्ष्य के मुकाबले केवल 11 हजार लोगों को प्रशिक्षण.
  • 17 करोड़ में से केवल 4.02 करोड़ रुपये खर्च.

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सार्वजनिक संस्थानों में नल-जल की स्थिति

  • आंगनबाड़ी: 5,602/8,985 (62.3%)
  • विद्यालय: 10,050/14,480 (69.4%)
  • ग्राम पंचायत भवन: 499/1,166 (42.8%)
  • स्वास्थ्य केंद्र: 339/640 (53%)

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