Raisen News: गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए बनी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान योजना’ को निजी अस्पतालों ने अवैध कमाई की खुली खान बना लिया है. रायसेन जिले के औद्योगिक शहर मंडीदीप के दीप नगर स्थित गंगा अस्पताल से इंसानियत और नियमों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां दांतों के मामूली इलाज के नाम पर एक बेबस मजदूर को 15 दिनों तक अस्पताल के बिस्तर पर बंधक जैसी स्थिति में रखा गया और अब उससे नए दांत लगाने के लिए 20,000 रुपये की खुली वसूली की जा रही है. जिस पर स्वास्थ्य महकमे का कोई कंट्रोल नजर नहीं आ रहा है.
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित गरीब मजदूर राजेंद्र पवार जब दांत के दर्द का इलाज कराने मंडीदीप के गंगा अस्पताल पहुंचा, तो अस्पताल प्रबंधन ने उसकी बीमारी से ज्यादा उसके आयुष्मान कार्ड पर नजर गड़ा दी. योजना से भारी-भरकम क्लेम पास कराने के लिए मजदूर के दांत निकाल दिए गए और उसे पूरे 15 दिन तक जबरन भर्ती रखा गया. खेल यहीं खत्म नहीं हुआ.
अस्पताल ने नए दांत लगाने का झांसा देकर एक महीने बाद राजेंद्र को दोबारा बुलाया और पिछले 5 दिनों से फिर से वार्ड में भर्ती कर रखा है. आयुष्मान के नाम पर सरकार से मोटा बिल उठाने के बाद, अब अस्पताल प्रबंधन का असली लालची चेहरा सामने आ गया है. पांच दिन से भर्ती इस लाचार मजदूर से नए दांत लगाने की एवज में 20 हजार रुपये कैश की मांग की जा रही है.
CMHO ने लिया मामले का संज्ञान
मजदूर की गुहार के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच टीम को अस्पताल भेजा. पीड़ित राजेंद्र पवार ने जांच अधिकारियों के साथ-साथ कैमरे पर भी अस्पताल के इस घिनौने खेल की एक-एक परत खोलकर रख दी.
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मामले पर गंभीर सवाल
इतने बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बावजूद स्वास्थ्य महकमे की जांच टीम की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल में कई अन्य मरीजों को भी इसी तरह फर्जी क्लेम के लिए अवैध रूप से भर्ती किए जाने की चर्चा थी, लेकिन जांच टीम महज पीड़ित मजदूर की एक फाइल देखकर औपचारिकता निभाते हुए बैरंग लौट गई.
आखिर स्वास्थ्य विभाग के अफसर अस्पताल के बाकी वार्डों और फाइलों की गहन जांच करने से क्यों बच रहे हैं? क्या इस फर्जीवाड़े की जड़ें सिर्फ अस्पताल तक हैं या महकमे के भीतर भी किसी का संरक्षण हासिल है?
