Sehore: कोई रोना-धोना नहीं… ढोल-डीजे की धुन पर अंतिम विदाई, परिवार ने की दादाजी की आखिरी इच्छा पूरी

आमतौर पर आपने देखा होगा कि जब किसी की मृत्यु होती है तो पूरे घर-परिवार समेत आस-पास भी मातम का माहौल छा जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है.
Sehore news

अनोखी अंतिम यात्रा

आमतौर पर आपने देखा होगा कि जब किसी की मृत्यु होती है तो पूरे घर-परिवार समेत आस-पास भी मातम का माहौल छा जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पर अंतिम यात्रा में कोई उदासी नहीं बल्कि डीजे-ढोल और फूलों के साथ परिजनों ने अपने दादा जी को विदाई दी. मामला सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के दीवाडिया गांव का है. जहां पर 100 साल के बुजुर्ग को ढोल-नगाड़ों के साथ विदाई दी गई.

उत्सव की तरह थी अंतिम यात्रा

बुजर्ग की अंतिम यात्रा ऐसे लग रही थी जैसे मानों कोई उत्सव मनाया जा रहा हो. इस अंतिम यात्रा में शामिल परिवार के किसी भी सदस्य के चेहरे पर दुख की झलक नजर नहीं आ रही थी. इसकी वजह से थी 100 से ऊपर जीवन जीने वाले गोविंद वर्मा की अंतिम इच्छा. दरअसल गोविंद वर्मा की अंतिम इच्छा थी.

उनका कहा था कि जब….

उनका कहा था कि जब भी उनका अंतिम समय आए, तो घर में कोई रोना-धोन न करे. उनकी दिली इच्छा थी कि उनकी अंतिम यात्रा दुखी होकर नहीं, बल्कि खुशी और पूरे सम्मान के साथ उत्सव की तरह निकाली जाए. पिता के निधन के बाद उनके बेटों, बाबूलाल वर्मा और बद्री प्रसाद वर्मा, ने पिता के इन्हीं शब्दों को अपना कर्तव्य माना.

परिजनों ने अपने आशुओं को रोककर गोविंद वर्मा की अंतिम इच्छा का मान रखा और अंतिम यात्रा में ढोल-नगाड़ों और डील का इंतजाम किया.

ये भी पढ़ें: ट्विशा मौत मामले में गिरिबाला सिंह को कल कोर्ट में पेश करेगी CBI, 4 घंटे की पूछताछ के बाद किया था गिरफ्तार

ज़रूर पढ़ें