पक्की सड़क के लिए तरस रहा MP का ये गांव! कीचड़ पार कर बच्‍चे पहुंचते हैं स्‍कूल, मरीजों के लिए नहीं आ पाती एंबुलेंस

MP News: मध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले की सांची विधानसभा क्षेत्र में है, जहां ग्रामीण पक्की सड़क के लिए लंबे समय से तरस रहे हैं.
School children crossing a muddy path.

कीचड़ का रास्‍ता पार करते स्‍कूल के बच्‍चे

MP News: सरकार हर गांव को शहर से जोड़ने और गांव में बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन ऐसे में कई गांव आज भी पक्की सड़क के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं. ऐसा ही एक गांव मध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले की सांची विधानसभा क्षेत्र में है, जहां ग्रामीण पक्की सड़क के लिए लंबे समय से तरस रहे हैं.

दरअसल, ग्राम पंचायत जमुनिया के ग्राम कयामपुर (दौलतपुर टोला) में आजादी के 78 साल बाद भी रास्‍ते दलदल में तब्दील होते दिखाई दे रहे हैं. हर साल बारिश के शुरू होते ही रास्‍तों की हालात ऐसी हो जाती है कि स्‍कूल जाने के लिए बच्‍चों को हाथ में चप्‍पल, कांधे पर स्‍कूल बैग टांगकर कीचड़ से होकर स्‍कूल जाना पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने दिए कई आवेदन और ज्ञापन पर नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों का कहना है कि यह ग्रामीण क्षेत्र सांची विधायक प्रभुराम चौधरी की विधानसभा के अंतर्गत आता है. सड़क का निर्माण कराने के लिए विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार आवेदन और ज्ञापन दिया जा चुका है. लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का काेई ठोस कदम नहीं उठाया गया. उनका आराेप है कि चुनाव के समय सड़क के निर्माण का वादा तो किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला ठंडे बस्‍ते में चला जाता है.

सप्‍ताह में एक दो दिन बच्‍चें पहुंचपाते स्‍कूल

ग्रामीणों ने कहा कि बारिश दौरान रास्‍ता इतना खराब हो जाता है कि कई बच्‍चे पूरे सप्‍ताह में मुश्किल से दो दिन ही स्‍कूल जा पाते हैं. किचड़ में फिसलने से उनकी किताबें और यूनिफॉर्म भी खराब हो जाती हैं. गांव तक न तो स्‍कूल वाहन पहुंचते हैं और नहीं कोई अन्‍य वाहन.

ग्रामीणों ने आगे कहा कि सरकार बच्‍चों के लिए स्‍कूल चले हम अभियान चला रही है, वहीं कयामपुर के बच्‍चों को रोज कीचड़ से जूझकर स्‍कूल पहुंचना पड़ता है.

बीमार लोगों के लिए नहीं आती एंबुलेंस

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी बीमार और बुजुर्ग लोगों को होती है. किचड़ के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंचती है और ऐसे में मरीजों को खाट पर लिटाकर करीब तीन किलोमीटर दूर मुख्‍य सड़क तक लाया जाता है, जहां से एंबुलेंस के माध्‍यम से उन्‍हें अस्‍पताल पहुंचाया जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के विकास के वादे और दावे केवल कागजों तक ही सीमित रहे जाते हैं. वर्षों से बदहाल सड़क लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. इस पर किसी भी जनप्रतिनि‍धियों और प्रशासन के अधिकारी ने गंभीरता नहीं दिखाई.

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