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यूपीएससी के भरोसे क्यों है एमपी? नए डीजीपी की नियुक्ति पर बड़ा सवाल, इन 3 नामों में से एक पर लगेगी मुहर

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एमपी पुलिस मुख्यालय

भोपाल – मध्यप्रदेश में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. प्रदेश में डीजीपी कैलाश मकवाना के इस पद पर दो साल पूरे होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं. चर्चा इस बात पर है कि यदि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश और झारखंड की तरह डीजीपी चयन के लिए सिलेक्शन कमेटी होती, तो नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. प्रदेश में डीजीपी चयन की प्रक्रिया को लेकर तीन नामों को लेकर चर्चा हो चुकी है. इधर, गृह विभाग ने तीन नामों का पैनल मध्य प्रदेश सरकर को दे भी दिया है. पुलिस मुख्यालय में चर्चा है कि स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव में से किसी एक अधिकारी को मध्य प्रदेश का नया डीजीपी बनाया जा सकता है.

मध्यप्रदेश सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को 12 आईपीएस अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव भेजा था . अब यूपीएससी इन अधिकारियों की सेवा संबंधी जानकारी और निर्धारित मानकों के आधार पर रिकॉर्ड की जांच करेगा. इसके बाद चयन प्रक्रिया के तहत बैठक होगी, जिसमें यूपीएससी के सदस्य, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी, गृह सचिव और राज्य के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. प्रक्रिया पूरी होने के बाद पैनल तैयार किया जाएगा और राज्य सरकार को भेजा जाएगा. इसी पैनल में शामिल नामों में से सरकार डीजीपी का चयन कर सकती है. इस पूरी प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है. बताया जा रहा है कि नवंबर तक फाइनल नाम कर लिया जाएगा.

यूपी और झारखंड में अलग व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में डीजीपी की नियुक्ति के लिए पुलिस अधिकारियों की सिलेक्शन कमेटी बनाई गई है. झारखंड में भी डीजीपी चयन के लिए कमेटी गठित की गई है. इन राज्यों में चयन प्रक्रिया को लेकर अलग व्यवस्था अपनाई गई है. ऐसे में मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बदले नियम

डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार राज्यों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है. इसका उद्देश्य पुलिस प्रमुख की नियुक्ति में पारदर्शिता और स्थिरता बनाए रखना है. विभिन्न राज्यों में चयन प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाएं चर्चा में रही हैं. ऐसे में मध्यप्रदेश में भी डीजीपी चयन के नियमों और प्रक्रिया को लेकर जल्द फैसला होगा.

वरिष्ठता और अनुभव अहम

डीजीपी चयन की प्रक्रिया में अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और निर्धारित पात्रता महत्वपूर्ण मानी जाती है. यूपीएससी की प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार को पैनल मिलने पर अंतिम चयन किया जाता है. मध्यप्रदेश में भेजे गए 12 अधिकारियों के नामों में से किन अधिकारियों को पैनल में जगह मिलती है, इस पर सबकी नजर रहेगी.

झारखंड में भी चयन समिति

झारखंड में भी डीजीपी की नियुक्ति के लिए चयन समिति बनाई गई है. यहां समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश करते हैं. समिति में मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग के प्रतिनिधि, झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या प्रतिनिधि तथा राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने का प्रावधान है. इस व्यवस्था को डीजीपी चयन की प्रक्रिया में राज्य की भूमिका बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जाता है.

ओडिशा में भी बदली व्यवस्था

ओडिशा में भी डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य स्तर पर चयन प्रक्रिया अपनाने की व्यवस्था चर्चा में रही है. राज्य सरकार ने डीजीपी चयन के लिए समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाए हैं. हालांकि, अलग-अलग राज्यों में समिति की संरचना और चयन प्रक्रिया के नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए मध्यप्रदेश में ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी होगा.

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