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MP में साइबर अपराध से 342 करोड़ की ठगी, 7 साल में 4 हजार से ज्यादा केस दर्ज

Symbolic picture.

सांकेतिक तस्वीर.

MP News: मध्यप्रदेश में वर्ष 2020 से 2026 तक साइबर अपराधों के मामलों और ठगी की रकम को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई हैं. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि इस अवधि में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी (आईटी एक्ट सहित) और अन्य साइबर अपराधों के कुल 4,454 प्रकरण दर्ज किए गए. केवल ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी में ही 329.98 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जबकि साइबर अपराधों के माध्यम से कुल गबन राशि 341.89 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

MP के 3,250 आरोपी गिरफ्तार

मुख्यमंत्री के अनुसार 2020 से 2026 के बीच 3,250 मध्यप्रदेश के मूल निवासी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा अन्य राज्यों के 1,153 आरोपी और विदेशों से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. हालांकि कई मामलों में अब भी आरोपियों की गिरफ्तारी शेष है. वर्ष 2026 में 14 आरोपी गिरफ्तारी से बाहर हैं, जबकि 2025 में 536, 2024 में 904, 2023 में 221, 2022 में 180, 2021 में 134 और साल 2020 में 371 आरोपियों की गिरफ्तारी शेष बताई गई है.

रकम की रिकवरी को लेकर भी सवाल

साइबर ठगी की रकम की रिकवरी को लेकर भी प्रश्न उठे हैं. सरकार के अनुसार 64.78 करोड़ रुपये की राशि जप्त की गई. विस्तृत जवाब में बताया गया कि कुल 26.96 करोड़ रुपये रिकवर किए गए और 25.57 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस लौटाए गए. एक अन्य उत्तर में पीड़ितों को 29.26 लाख रुपये लौटाने की जानकारी भी दी गई. वर्ष 2026 में रिकवरी के संबंध में जबलपुर से मात्र 2 प्रतिशत राशि ही रिकवर होने की बात कही गई है, जिससे प्रवर्तन और तकनीकी जांच की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं.

7 सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 248 गिरफ्तारी

महिलाओं के साथ होने वाले साइबर अपराधों को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं. पिछले सात वर्षों में महिलाओं से संबंधित 265 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 248 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई. बावजूद इसके सात वर्षों में केवल छह मामलों में सजा हो सकी है. प्रताप ग्रेवाल ने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि वर्ष 2021, 2022 और 2023 में 41-41 शिकायतें दर्ज होना भी विश्लेषण का विषय है.

ग्रेवाल ने कम रिकवरी प्रतिशत और सजा दर पर सवाल उठाते हुए साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए मजबूत मॉनिटरिंग तंत्र, तकनीकी संसाधनों के विस्तार और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया की मांग की है. बढ़ते साइबर अपराध और भारी आर्थिक नुकसान ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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