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MP News: साल 2025 में 634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी, रिकवरी में अब छठे स्थान पर मध्य प्रदेश

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सांकेतिक तस्वीर

MP News: प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान साइबर ठगी के मामलों में राशि फ्रीज टॉप फाइव से बाहर है. खासबात यह है कि यह स्थान भी साइबर ठगी की कुल राशि का महज 22 प्रतिशत फ्रीज करवा सकी. इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश की पुलिस ठगी की कुल राशि का महज 7.4 प्रतिशत ही पीड़ितों को वापस दिलवा सकी. इसके बाद भी राशि रिकवर करवाने में मध्य प्रदेश का देश के राज्यों में छठवां स्थान है.

634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी

प्रदेश में पिछले साल करीब 634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई. यह वह आंकड़ा है जो पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. प्रदेश की साइबर पुलिस इन मामलों में केवल 137 करोड़ रुपये की राशि ही फ्रीज करा सकी, जबकि 47 करोड़ रुपये की राशि पीड़ितों को वापस लौटाई जा सकी. साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच यह आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 4 हजार 800 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुई. साइबर अपराधों में अक्सर देखा जाता है कि अपराध दूसरे राज्यों से संचालित किए जाते हैं. इससे जांच में अधिक समय और संसाधन खर्च होते हैं. अधिकारियों के अनुसार, अब राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है, ताकि बिना लंबी यात्राओं के जरूरी जानकारी मिल सके और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके.

क्राइम के बाद गोल्डन ऑवर सबसे अहम

साइबर ठगी के बाद के पहले दो घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. यदि पीड़ित तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करता है, तो राशि को अपराधी के खाते तक पहुंचने से पहले ही फ्रीज किया जा सकता है. अब शुरू हुई ई-जीरो एफआईआर सिस्टम के तहत आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे डिजिटल सबूत तुरंत और कानूनी रूप से सुरक्षित हो जाते हैं, जिससे राशि की रिकवरी की संभावना बढ़ने लगी है.

4 हजार से ज्यादा केस, 47 करोड़ वापस दिलाए

राज्य साइबर पुलिस के अधिकारियों की माना जाए तो कई मामलों में पीड़ितों की जीवनभर की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में साफ हो जाती है, क्योंकि वे समय पर ना तो पुलिस को और न ही बैंक को सूचना देते हैं. एफआईआर दर्ज न होने के कारण ठगी की राशि की रिकवरी बेहद कम रह जाती है. हालांकि 47 करोड़ की राशि वापस दिलाने के बाद, रिकवरी के मामले में प्रदेश देश में छठे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पहले यह रैंक 22वीं थी.

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