मुरैना में आदिवासी गांवों में जल संकट, 45 डिग्री में महिलाएं कई किलोमीटर दूर जाने को मजबूर; गंदा पानी पीने से लोग हो रहे बीमार

ग्रामीणों ने प्रशासन से हैंडपंप और नल-जल योजना का लाभ पहुंचाने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले बरसात के दिनों में फिर हजारों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर होंगे.
Women filling water from a well in Barkheda Gram Panchayat of Mauganj.

मऊगंज के बरखेड़ा ग्राम पंचायत में कुएं से पानी भरती महिलाएं.

Input- मनोज शर्मा

MP News: मध्य प्रदेश के मुरैना में एक जिला प्रशासन हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रहा है, वहीं जिले के सीमावर्ती आदिवासी गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बरखेड़ा ग्राम पंचायत के बहेरी समेत आसपास के पांच गांवों में हालात इतने खराब हैं कि महिलाएं और बच्चे 45 डिग्री की भीषण गर्मी में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं.

‘बीमारी के कारण कई लोगों की जान चली गई’

ग्रामीणों के अनुसार गांव में आज तक स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं हो सकी. गर्मियों में किसी तरह दूर स्थित कुओं से पानी मिल जाता है, लेकिन बरसात शुरू होते ही रास्ते कीचड़ में डूब जाते हैं और पूरा गांव नालों और गड्ढों में जमा गंदा पानी पीने को विवश हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल जलजनित बीमारियां फैलती हैं और अब तक कई लोगों की जान तक जा चुकी है.

‘कई दशकों के बाद भी शुद्ध पेयजल नहीं पहुंचा’

बहेरी गांव में करीब 200 आदिवासी परिवार रहते हैं. बहेरी गांव मुरैना और श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित है, लेकिन आजादी के दशकों बाद भी यहां तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पाया. ग्रामीणों को श्योपुर जिले की विजयपुर तहसील के बीटा गांव के जंगल में बने कुएं से पानी भरकर लाना पड़ता है.
ग्रामीण महिला दख्खो बाई ने बताया वह 25 साल पहले जब वह इस गांव में दुल्हन बनकर आई थीं, तब भी पानी की यही समस्या थी और आज भी हालात नहीं बदले हैं. उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सिर पर घड़े रखकर पानी ढोते हुए गुजर गई, लेकिन गांव की प्यास आज तक नहीं बुझी.

ग्रामीणों ने प्रशासन से हैंडपंप और नल-जल योजना का लाभ पहुंचाने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले बरसात के दिनों में फिर हजारों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर होंगे. ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी में किसी तरह कुएं का पानी मिल जाता है, लेकिन बरसात आते ही जिंदगी और भयावह हो जाती है. तब हमें नालों और गड्ढों का गंदा पानी पीना पड़ता है.

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