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MP News: IAS संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार को केंद्र के जवाब का इंतजार, जीएडी ने पत्र में लिखा- सामाजिक तनाव फैलाने वाला बयान

IAS Santosh Verma (File Photo)

IAS संतोष वर्मा(File Photo)

MP News: ब्राह्मण बेटियों को लेकर अपशब्द कहने वाले और हाईकोर्ट पर एससी-एसटी को सिविल जज नहीं बनने देने का आरोप लगाने वाले आईएएस एवं अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के अध्यक्ष संतोष वर्मा पर कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पिछले दो महीने में कोई निर्णय नहीं ले पाई है. मध्‍य प्रदेश सरकार ने गत 12 दिसंबर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को संतोष वर्मा को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी प्रस्ताव भेजा था. सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) दो महीने से केंद्र के जवाब का इंतजार कर रहा है.

प्रदेश में विरोध के बाद सरकार ने पद से हटाया

ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित बयान सामने के बाद संतोष वर्मा के खिलाफ बढ़ते विरोध को शांत करने के लिए दिसंबर में सरकार ने उन्हें उप सचिव कृषि विभाग के पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (पूल) में पदस्थ कर दिया था. उनके पास दो महीने से कोई काम नहीं है. जीएडी के अधिकारियों का कहना है कि कोई भी विभाग वर्मा को अपने यहां लेने को तैयार नहीं है, इसलिए वे दो महीने से जीएडी (पूल) में पदस्थ हैं.

पदोन्नति व आपराधिक प्रकरण का दिया ब्यौरा

जीएडी की ओर से डीओपीटी को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि 23 नवंबर, 2025 को अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में वर्मा द्वारा दिए गए बयान के बाद प्रदेश में सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. विभिन्न सामाजिक संगठन, कर्मचारी संघ और जनप्रतिनिधियों की ओर से शासन को कई ज्ञापन सौंपे गए हैं, जिनमें वर्मा के आचरण को अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के खिलाफ बताया गया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि 2012 बैच के आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को आईएएस पद से पृथक करने और आईएएस अवार्ड वापस लिए जाने के संबंध में अभ्यावेदन के परीक्षण के बाद यह प्रस्ताव भेजा गया है.

पुराने अपराध के जरिए हो सकता है एक्शन

शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वर्मा मूलतः राज्य प्रशासनिक सेवा (आवंटन वर्ष 1996) के अधिकारी हैं. वर्ष 2019 में उन्हें राज्य सेवा से आईएएस में पदोन्नति के लिए चयन क्षेत्र में शामिल किया गया था. उस समय उनके विरुद्ध अपराध क्रमांक 851/2016 लंबित होने के कारण उनकी संवीक्षा प्रमाणित नहीं की जा सकी थी. इसके बावजूद चयन समिति की बैठक में उनका नाम अनंतिम रूप से शामिल किया गया. 6 अक्टूबर, 2020 का एक न्यायालयीन आदेश प्रस्तुत किए जाने के आधार पर उन्हें दोषमुक्त बताया गया और 16 अक्टूबर, 2020 को उनकी संवीक्षा प्रमाणित कर दी गई. इसके बाद भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेश 6 नवंबर, 2020 के द्वारा उन्हें आईएएस अवार्ड किया गया.

वर्मा के खिलाफ जारी है विभागीय जांच

इस मामले में शिकायत होने पर पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि 6 अक्टूबर, 2020 का न्यायालयीन आदेश वास्तव में पारित ही नहीं हुआ था. इसे फर्जी पाए जाने पर वर्मा के विरुद्ध अपराध क्रमांक 155/2021 दर्ज किया गया. पुलिस ने उन्हें 10 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया था. निचली अदालत और उच्च न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद 27 जनवरी, 2022 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली. पुलिस अभिरक्षा में 48 घंटे से अधिक समय तक रहने के संतोष वर्मा को 13 जुलाई, 2021 को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के अंतर्गत निलंबित किया गया. वर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच अभी भी जारी है.

वर्मा को जारी हुआ था शोकॉज नोटिस

बता दें कि गत 23 नवंबर को भोपाल में आयोजित अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा ने कहा था कि ‘जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए. वर्मा के इस बयान को लेकर सामाजिक, धार्मिक व कर्मचारी संगठनों के बढ़ते विरोध के बीच राज्य शासन ने गत 26 नवंबर की देर रात उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया था. उन्हें नोटिस का जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया था. वर्मा द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब से असंतुष्ट होकर और विभिन्न संगठनों के बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने वर्मा की बर्खास्तगी संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था.

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