ढाई किलो की है मां वाग्देवी की प्रतिमा, जिसे लुटेरे खिलजी ने खंडित किया था; क्या लंदन से वापस आ पाएगी मूर्ति?
मां वाग्देवी की खंडित प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम में रखा गया है.
MP News: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद में इंदौर हाई कोर्ट ने मंदिर होने की मुहर लगा दी है. हाई कोर्ट ने भोजशाला पर नियमित पूजा करने के साथ ही नमाज अदा करने के आदेश को भी रद्द कर दिया. इसको लेकर हिंदू पक्ष ने खुशी का इजहार किया और शनिवार सुबह से ही भक्तों की बड़ी संख्या भोजशाला में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंच गई. भक्तों ने कहा है कि अब हम पूरे अधिकार से इसमें पूजा कर सकेंगे. लेकिन इसके साथ ही एक सवाल और खड़ा हो गया है कि जिस मां वाग्देवी के नाम पर ये मंदिर है, उनकी प्रतिमा को वापस यहां लाया जा सकेगा? मां वाग्देवी की प्रतिमा इस समय लंदन के म्यूजियम में रखी है.
लुटेरे खिलजी ने 1305 में मालवा पर किया था हमला
सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज पेश हुए उसके मुताबिक 1034 में राजा भोज ने भोजशाला में मंदिर का निर्माण करवाया था. इसके बाद 1035 में यहां सरस्वती की मूर्ति रखने के बाद यहां विधि-विधान से पूजा की जाने लगी. कई सालों तक ये परंपरा ऐसे ही चलती रही. लेकिन साल 1305 ई. में आक्रमणकारी अलालुद्दीन खिलजी ने मालवा पर आक्रमण कर दिया. खिलजी ने भोजशाला मंदिर में भी तोड़फोड़ की. इस दौरान मूर्तियों को खंडित करके जमीन में गाड़ दिया. अलालुद्दीन खिलजी के बाद महमूद खिलजी ने 15वीं शताब्दी में यहां मौलाना कमालुद्दीन के नाम पर भोजशाला परिसर के बाहर मकबरा बनवाया था.
1875 में अंग्रेज अधिकारियों ने मूर्तियों को संरक्षित किया
भारत में अग्रेजों के आने के बाद साल 1875 में अंग्रेज अधिकारियों ने भोजशाला परिसर की खुदाई करवाई. इस दौरान बड़ी संख्या में यहां मूर्तियां दबी हुई मलीं. तभी वाग्देवी की खंडित प्रतिमा भी यहां दबी मिली थी. लेकिन अंग्रेजों ने खंडित प्रतिमा को इंग्लैंड भेज दिया. जिसके बाद प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम में संरक्षित रखा गया है.
इसके बाद 1904 से ही भोजशाला परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया था. इसकी देखरेख अंग्रेज अधिकारी करवाते थे. इसके बाद से ही विवाद चलता रहा और एएसआई ने इसे संरक्षित रखा. साल 2003 में एएसआई ने हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष दोनों को ही पूजा और नमाज पढ़ने का अधिकार दिया था. एएसआई ने हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में पूजा का अधिकार, और जुमे(शुक्रवार) को मुस्लिमों को एक दिन के लिए नमाज पढ़ने का अधिकार दिया था. इसके बाद इंदौर हाई कोर्ट का आदेश आने तक ऐसे ही चलता रहा.
भारत वापस आएगी वाग्देवी की प्रतिमा!
मां वाग्देवी की प्रतिमा लगभग ढाई किलो और 4 फीट की है. खंडित प्रतिमा लंदन के म्यूजियम में रखी है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ऐलान किया था कि वह प्रतिमा को लंदन से वापस धार लाने की कोशिश करेंगे. लेकिन जानकारों की मानें तो प्रतिमा को वापस भारत लाना इतना आसान नहीं है. ये दो देशों के बीच का मामला है. हालांकि इसके पहले भी अंग्रेजों के शासनकाल में देश के बाहर गईं कई ऐतिहासिक चीजों को वापस लाया गया. ऐसे में मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की संभावना बढ़ गई है.
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