MP Guna: मध्य प्रदेश के गुना में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरा मामला बैलों की खरीद से जुड़ा हुआ है. पूरा मामला अलीराजपुर के आदिवासी किसानों से जुड़ा हुआ है. किसान बैल खरीदकर अपने घर ले जा रहे थे. रास्ते में उनके दो वाहनों को गौ सेवकों ने रोक लिया.
किसान दो वाहनों में कुल मिलाकर 10 बैलों को लोड किए हुए थे. मामला पुलिस तक पहुंचा तो दोनों वाहन जब्त कर लिए गए और छह लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत FIR दर्ज हो गई. खास बात यह है कि किसानों के पास कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान का पत्र भी था, जिसमें खेती के लिए बैल ले जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था.
क्या है पूरा मामला?
मामला अलीराजपुर के किसानों से जुड़ा है. वे गुना के छिकारी गांव पहुंचे थे, जहां से उन्होंने खेती के काम के लिए बैल खरीदे. इसके बाद 10 बैलों को दो वाहनों में लेकर वापस लौट रहे थे. इसी दौरान गौ सेवकों को सूचना मिली कि पशुओं को वाहनों के जरिए ले जाया जा रहा है. उन्होंने दोनों गाड़ियों को रोककर पुलिस को जानकारी दी. पुलिस टीम मौके पर पहुंची और वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया.
किसानों के पास था मंत्री का पत्र
इस मामले में मंत्री का पत्र सबसे अहम कड़ी बन गया है. पत्र फतेहगढ़ थाना प्रभारी के नाम था. इसमें अलीराजपुर के पांच किसानों को छिकारी गांव से 10 बैल ले जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था. पत्र में उन दोनों वाहनों के नंबर भी लिखे गए थे, जिनसे बैल ले जाए जा रहे थे. किसानों के पहचान पत्र, जमीन से जुड़े दस्तावेज और अन्य कागजात भी साथ होने की बात सामने आई है.
गौ सेवकों ने क्या आरोप लगाया?
गौसेवक मोनू ओझा ने पशुओं को ले जाने के तरीके पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि बैलों के गले में रस्सियां बंधी थीं और उनके लिए चारे-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. गुना के ASP प्रशांत सिंह सुमन ने छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की पुष्टि की है.
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