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MP News: मुरैना में नियमों को दरकिनार करके दौड़ रही एम्बुलेंस, फ‍िटनेस हुई खत्म फिर भी जिम्मेदार बेखबर

Ambulance fitness expired

फिटनेस खत्म एम्बुलेंस

रिपोर्ट – मनोज शर्मा

MP News: मुरैना में जिला चिकित्सालय मुरैना में संचालित रेड क्रॉस की दो और रोगी कल्याण समिति की एक एम्बुलेंस कथित रूप से फिटनेस अवधि समाप्त होने के बावजूद सड़कों पर दौड़ रही हैं. गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए इन वाहनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

फिटनेस और रजिस्ट्रेशन अवधि समाप्त

जानकारी के अनुसार, रेड क्रॉस समिति की एम्बुलेंस क्रमांक MP06 DA 0262 का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) समाप्त हो चुका है, जबकि दूसरी एम्बुलेंस MP06 DA 0161 की फिटनेस अवधि भी समाप्त बताई जा रही है. इसी प्रकार रोगी कल्याण समिति की एंबुलेंस MP06 DA 0188 की फिटनेस भी खत्म हो चुकी है. इसके बावजूद इन वाहनों का लगातार उपयोग किया जा रहा है.

मध्य प्रदेश से बाहर तक ले जाए जा रहे मरीज

बताया जा रहा है कि रेड क्रॉस की एसी एंबुलेंस के माध्यम से मरीजों को मध्य प्रदेश से बाहर तक ले जाया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार कई बार गंभीर मरीजों को दूर-दराज के राज्यों, यहां तक कि बिहार तक पहुंचाने के लिए भी इन वाहनों का उपयोग किया जाता है. ऐसे में फिटनेस समाप्त होने के बावजूद एम्बुलेंसों का संचालन मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फिटनेस समाप्त हो चुकी कोई एंबुलेंस दुर्घटना का शिकार हो जाती है या रास्ते में तकनीकी खराबी आ जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या जिला अस्पताल प्रबंधन, रेड क्रॉस समिति और संबंधित अधिकारी मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, या फिर नियमों को नजरअंदाज कर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं?

नियमों की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही?

नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक अथवा सार्वजनिक उपयोग के वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वैध होना अनिवार्य है. इसके बावजूद यदि एंबुलेंसों का संचालन किया जा रहा है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला माना जा सकता है. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वाहनों के मामले में इस तरह की अनदेखी और भी चिंताजनक मानी जाती है.

मरीजों की जान से खिलवाड़ कब तक?

अब सवाल यह है कि मरीजों की जान बचाने के लिए बनाई गई एंबुलेंसें आखिर कब तक नियमों को ताक पर रखकर भगवान भरोसे दौड़ती रहेंगी? जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करेंगे और इन वाहनों की वैधता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखने वाली बात होगी.

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