Gwalior News: ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती का असर गुरुवार को कोर्ट परिसर में भी दिखाई दिया. नगर निगम को 2021 से 2026 तक शहर में हुए सड़क निर्माण, मरम्मत और पैचवर्क का रिकॉर्ड पेश करना था. इसके लिए मिनी ट्रक भरकर फाइलें हाई कोर्ट पहुंचाई गईं. रिकॉर्ड का ढेर देखकर कोर्ट ने अब दस्तावेजों में दर्ज दावों की मौके पर जांच कराने का फैसला किया है.
रिकॉर्ड से सड़कों का होगा मिलान
नगर निगम ने पांच साल में सड़क निर्माण, मरम्मत, पैचवर्क और इन कार्यों पर हुए खर्च से जुड़े दस्तावेज पेश किए हैं. अब इन रिकॉर्ड का शहर की वास्तविक सड़कों से मिलान कराया जाएगा. कोर्ट यह देखेगा कि कागजों में जिन कार्यों को पूरा बताया गया है, वे जमीन पर भी हुए हैं या नहीं.
तीन वरिष्ठ वकीलों की कमेटी करेगी जांच
हाईकोर्ट ने तीन वरिष्ठ वकीलों की विशेष जांच कमेटी गठित की है. यह कमेटी प्रमुख मार्गों, चौराहों और संबंधित स्थानों का निरीक्षण करेगी. टीम रिकॉर्ड में दर्ज सड़क निर्माण और मरम्मत के दावों की मौके की स्थिति से तुलना करेगी. जांच के बाद रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी.
129 सड़कों की स्थिति पर मांगी थी रिपोर्ट
मामला ग्वालियर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. पिछली सुनवाई में निगम ने 129 प्रमुख सड़कों की रिपोर्ट पेश की थी. इसमें 62 सड़कें चलने लायक, 24 पूरी तरह क्षतिग्रस्त और 34 आंशिक रूप से खराब बताई गई थीं. कोर्ट ने पांच साल में सड़क निर्माण पर खर्च राशि और मेजरमेंट बुक समेत मूल दस्तावेज भी तलब किए थे.
खुदाई कर जांची जाएगी निर्माण गुणवत्ता
सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए एडवोकेट कमिश्नर की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच की तैयारी है. तकनीकी विशेषज्ञ सड़क की खुदाई कर निर्माण सामग्री और सरकारी मानकों के पालन की जांच करेंगे. कोर्ट ने कहा था कि जांच के दौरान निगम का कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा, केवल अधिकृत वकील को उपस्थित रहने की अनुमति होगी.
सीवर और एलिवेटेड रोड से भी प्रभावित सड़कें
निगम के अधीक्षण यंत्री ने बताया था कि बहोड़ापुरा से सागरताल मेन रोड पर सीवर लाइन डालने से सड़क खराब हुई. वहीं छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत, रामकुई से भैंस मंडी पुल और तारागंज पुल से कमानी पुल तक एलिवेटेड रोड निर्माण के कारण भी सड़क और यातायात प्रभावित हुआ है.
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