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पुरानी पेंशन पर एमपी हाई कोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील, शिक्षकों के पक्ष में सुनाया फैसला

MP High Court

एमपी हाई कोर्ट, ग्वालियर खंडपीठ

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर संघर्ष कर रहे शिक्षकों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सरकार की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें 2018 में हुए संवर्ग संविलियन को नई नियुक्ति माना गया था. हाई कोर्ट का ये फैसला शिक्षकों के लिए किसी दिवाली गिफ्ट से कम नहीं है. हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई हैं.

न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने अपील की खारिज

ये फैसला न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने सुनाया है. इस फैसले का फायदा 1998 से 2005 के बीच पंचायत एवं नगरीय निकाय के माध्यम से नियुक्त 99 हजार से अधिक शिक्षकों को मिल सकता है. हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकार को निर्देश दिया है कि अगर शिक्षकों की वरिष्ठता पुरानी तारीख से मानी तो उन्हें ओल्ड पेंशन दें.

कोर्ट ने कहा कि सरकार अगर शिक्षा कर्मियों की पिछली सेवाओं को मान्य कर क्रमोन्नति और विशेषता का लाभ दे रही है, तो पुरानी पेंशन से उन्हें वंचित नहीं कर सकते. साथ ही याचिकाकर्ता शिक्षिका करुणा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एनपीएस फंड को ओपीएस फंड में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है.

न्यू पेंशन स्कीम

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर न्यू पेंशन स्कीम अनिवार्य की गई थी. लेकिन इन शिक्षकों की मूल नियुक्ति 1998 से 2001 या 2003 के दौरान शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी. इसलिए इस आदेश के तहत उनकी नियुक्ति तिथि 2005 से पहले की मानी गई. इसी आधार पर सरकार ने उन्हें पुरानी पेंशन देने से इनकार किया था शिक्षक लगातार इसका विरोध कर रहे हैं और पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की मांग कर रहे हैं.

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