Damoh News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह जिले के 17 साल पुराने हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. गुरुवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने दो सगे भाइयों की उम्रकैद की सजा रद्द कर उन्हें तत्काल रिहा करने के आदेश दिए. कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां और साक्ष्यों में कई विरोधाभास हैं.
2009 में हुई थी हत्या
पूरा मामला दमोह जिले के मड़ियादो थाना क्षेत्र का है. 25 अगस्त 2009 की रात करीब 8:45 बजे प्यारेलाल गड़रिया की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने बालाजी मोहल्ला निवासी तुलसीराम राजपाल और उनके भाई हरप्रसाद को आरोपी बनाया था. दमोह जिला एवं सत्र न्यायालय ने 29 जून 2012 को दोनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी.
एफआईआर और गवाहों पर उठे सवाल
सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर कड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने पाया कि यह तक स्पष्ट नहीं है कि एफआईआर किस पुलिसकर्मी ने लिखी. जिस अधिकारी ने एफआईआर तैयार की उसका बयान भी पेश नहीं किया गया. कोर्ट ने संदेह जताया कि मृतक सामान्य हस्ताक्षर करता था, लेकिन एफआईआर पर अंगूठे का निशान था. इससे आशंका है कि एफआईआर मौत के बाद तैयार की गई और अंगूठे का उपयोग किया गया.
गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास मिला
बेटे ने कहा पिता की मौत थाने से निकलते ही हो गई, पत्नी ने कहा अस्पताल तक जीवित थे, जबकि डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल लाते समय ही मृत्यु हो चुकी थी. इसके अलावा हत्या में इस्तेमाल कथित चाकू की एफएसएल रिपोर्ट में खून नहीं मिला और मुख्य गवाहों के बयान 15-30 दिन बाद दर्ज हुए.खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. दोषपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने दोनों भाइयों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
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