Jabalpur News: रिश्तों को समझने के लिए केवल भावनाओं की जरूरत पड़ती है. फिर चाहे वो इंसानों के बीच के हो या फिर जानवरों के साथ. इंसानों के साथ-साथ जानवर कहे जाने वाले मूक प्राणी भी प्रेम की भाषा समझते हैं. ऐसा ही एक रिश्ता बन गया है जबलपुर के रहने वाले अमन और एक गिलहरी के बीच.
गिलहरी को कुत्तों के हमले से बचाया था
दरअसल, जबलपुर के दीक्षितपुरा क्षेत्र में रहने वाले अमन पाटकर का एक गिलहरी से ऐसा नाता जुड़ गया है जैसे मानो पिता और बेटी के बीच का रिश्ता हो. आवाज देते ही वह दौड़ी चली आती है और उसके कंधे पर सवार हो जाती है. अमन ने बताया कि कुछ समय पहले गिलहरी पर कुतों ने हमला कर दिया था. उसने उसकी जान बचाई और घर में लाकर उसका इलाज व देखभाल की. इसके बाद गिलहरी को उसने छोड़ा तो वह कहीं जाने तैयार नहीं हुई. वह उसके आसपास और घर में उछल-कूद करती रहती है और परिवार का हिस्सा बन गई है. अमन ने उसने नीनू नाम दिया है और उसे बेटी की तरह दुलार भी दे रहा है.
एक ही थाली में खाना खाती है गिलहरी
अमन ने बताया कि करीब चार माह पहले वह मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया था, तो वहां पर उसने देखा कि परिसर पर कुत्ते किसी जानवर को नोंच रहे हैं. वह पास पहुंचा तो देखा कि गिलहरी का बच्चा है. उसने उसे तुरंत उठाया और साफ करके पेड़ के ऊपर रख दिया. काफी देर रुकने के बाद जब गिलहरी के माता-पिता लेने नहीं आए, तो वह खुद उसे घर ले आया और पूरा उपचार खुद किया और तब से वह आज भी उसी के साथ है. अमन जिस थाली में खाता है उसी थाली से गिलहरी भी भोजन करती है. दोपहर में जब भूख लगती है तो वह उसके कान के पास आकर गुदगुदाती है, शर्ट के अंदर बैठकर बाइक की सवारी करती है और अमन के साथ ही उसके काम पर जाती है.
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अमन ने बताया कि शादी को चार साल हो गए और उसका कोई बच्चा नहीं है. जब से नीनू आई तो हमारे घर में खुशियां आ गईं. हम उसे अब बेटी की तरह ही पालते हैं. मेरी पत्नी अंजली भी नीनू को पसंद करती है.
