MP News: मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी आस्था का भी बड़ा केंद्र है. आज पूरे मध्य प्रदेश में नर्मदा जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है, खासकर उन शहरों में जहां नर्मदा नदी का प्रवाह हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान करने घाटों पर पहुंच रहे हैं नर्मदा न केवल जीवन रेखा है बल्कि ये नदी धार्मिक आध्यात्मिक और आस्था का बड़ा महत्व है.
नर्मदा जयंती के मौके पर जबलपुर में आयोजन हुआ
संस्कारधानी जबलपुर में भी नर्मदा जयंती के मौके पर भव्य और विविध धार्मिक आयोजन आयोजित किए गए हैं. इस मौके पर गौरीघाट नर्मदा तट पर जहां एक तरफ कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने साधु संतों के साथ पूजन किया, तो वहीं दूसरी तरफ लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी साधु संतों के साथ मां नर्मदा की प्रतिमा रथ पर लेकर रवाना हुए. रेतनाका से गौरी घाट तक कैबिनेट मंत्री ने मां नर्मदा की पालकी कंधों पर उठाकर ‘मां नर्मदा’ के जयकारा लगाए. इस मौके पर बड़ी तादात में साधु संत और नर्मदा भक्त भी शामिल हुए.
कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने क्या कहा?
- गौरी घाट पहुंचने के बाद कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने साधु संतों के साथ मां नर्मदा का दुग्ध अभिषेक किया और फिर तकरीबन 1100 फीट लंबी चुनरी से मां नर्मदा का श्रृंगार किया.
- इस मौके पर राकेश सिंह ने कहा कि मां नर्मदा की आशिम कृपा मध्य प्रदेशवासियों पर हमेशा रही है. मां नर्मदा को लेकर भक्तों में भी अटूट श्रद्धा है.
- आगे उन्होंने कहा की आज इस श्रद्धा के तहत लाखों लोग मां नर्मदा नदी में स्नान ध्यान और पूजन अर्चन करने आ रहे हैं. नर्मदा जयंती पर प्रदेशवासी मां नर्मदा को स्वच्छ निर्मल और शुद्ध रखने का संकल्प लें.
नर्मदा जयंती पर पुख्ता इंतजाम
नर्मदा जयंती पर घाटों पर उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं. मुख्य चौक चौराहों पर यातायात को डायवर्ट किया गया है, तो वहीं घाटों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीम को तैनात किया गया है. नर्मदा नदी में अवस्था ना पहले इसके लिए पिछले 48 घंटे से नर्मदा में नावों के संचालन को प्रतिबंधित कर दिया है.
नर्मदा नदी का प्राकट्य कैसे हुआ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के पसीने से मां नर्मदा का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इन्हें ‘शिवपुत्री’ भी कहा जाता है. मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं जिनकी ‘परिक्रमा’ की जाती है. इनके हर कंकड़ को ‘शंकर’ का रूप माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, नर्मदा जयंती पर दीपदान करने और मैया की आरती करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और घर में सुख-शांति आती है. मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी भारत की सांस्कृतिक एकता और कृषि समृद्धि का मुख्य आधार है.
