Vistaar NEWS

MP के इस मंदिर में दूल्हा हैं भोलेनाथ तो दुल्हन के रूप में विराजमान हैं मां पावर्ती, जानें इस अनोखे मंदिर का रहस्य

jabalpur_unique_shiv_temple

जबलपुर का अनोखा शिव मंदिर

Jabalpur Unique Shiv Mandir: भारत में भगवान शिव के कई प्रसिद्ध और अनोखे मंदिर हैं, जहां भगवान भोलेनाथ के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होते हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव दूल्हे और माता पार्वती दुल्हन के रूप में नंदी पर विराजमान हैं.

भगवान शिव का अनोखा मंदिर

संस्कारधानी जबलपुर का भेड़ाघाट क्षेत्र, जो नर्मदा नदी के विहंगम नजारे धुआंधार के लिए प्रसिद्ध है. इसी धुआंधार वाटरफॉल के पास ही स्थित है 64 योगिनी मंदिर, जो अपने ऐतिहासिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है . इस मंदिर में सबसे खास है यहां स्थापित भगवान शिव और पार्वती की अनोखी प्रतिमा.

कहा जाता है कि पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें भगवान शिव-पार्वती दूल्हा और दुल्हन के वैवाहिक रूप में दिखाई दे रहे हैं. प्रतिमा में नंदी के ऊपर भगवान शिव और पार्वती विराजमान हैं. माना जाता है कि यह प्रतिमा भगवान शिव की बारात का एक दृश्य है. ऐसी प्रतिमा पूरी दुनिया में और कहीं नहीं हैं.

भोलेनाथ की बारात का प्रतीक है ये मंदिर

मंदिर के प्रधान पुजारी के मुताबिक भगवान शिव जब हिमाचल से माता पार्वती के साथ विवाह कर अपनी बारात लेकर वापस लौट रहे थे, तो उनके साथ पार्वती के पिता ने चौसठ योगिनीयों को भी साथ में भेजा था. यह पूरा मंदिर उसी बरात का एक प्रतीक है. इस मंदिर में जो भी मनोकामना मांगी जाती है वह जरूर पूरी होती है. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में विशेष पूजा आयोजित की जाती है. भगवान शिव की अनोखी प्रतिमा के दर्शन करने के लिए भक्त महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

ये भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ का अनोखा शिव मंदिर, जहां एक ही गर्भगृह में 3 शिवलिंग! ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में होती है पूजा

भृगु ऋषि की तपोस्थली

ऐसा कहा जाता है कि जबलपुर का भेड़ाघाट क्षेत्र भृगु ऋषि की तपोस्थली थी. भृगु ऋषि ने इस स्थान पर एक मठ की स्थापना की थी, जो बाद में मंदिर बन गया. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि आज भी गोरखनाथ मठ के साधु-संत मंदिर में तंत्र साधना करने के लिए आते हैं. लेकिन इस मंदिर का जितना धार्मिक और पौराणिक महत्व है उतना ही ऐतिहासिक भी है क्योंकि यह मंदिर कलचुरी कालीन बताया जाता है. करीब 1200 साल पहले कल्चुरी कालीन राजाओं ने इस मंदिर का निर्माण कराया था लेकिन मुगल शासक ने इस मंदिर पर आक्रमण करके कई प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया था. हालांकि,भगवान शिव की प्रतिमा आज भी सुरक्षित हैं.

मध्य प्रदेश का भेड़ाघाट पर्यटन के नक्शे में एक अलग पहचान रखता है. नर्मदा नदी की धुआंधार का नजारा देखने के लिए आने वाले पर्यटक एक बार चौसठ योगिनी मंदिर जरूर आते हैं. यहां महाशिवरात्रि में विशेष पूजा होती है. ऐसी मान्यता है कि मंदिर में आज तक जो भी मांगा है वह जरूर पूरा हुआ है. मंदिर में पहली बार आने वाले लोग तो इसकी भव्यता देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.

Exit mobile version