Jabalpur News: अगर नई तकनीक और जागरूकता के साथ खेती की जाए तो न केवल फसलें आपको फायदा देगी बल्कि खाद भी आपको करोड़पति बना सकती है. जबलपुर के ऐसे ही एक युवा ने लाखों की नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू की और आज करोड़पति बन गया.
सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये
शहर के युवा हृदेश राय ने कोविड के दौरान करीब 12 लाख रुपए सालाना के आईटी पैकेज वाली नौकरी छोड़कर 2020 में वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया. आज हृदेश अपने पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा के साथ 2022 में ‘’केंचुआ आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड’’ नाम से फर्म रजिस्टर्ड करवाई और अब सफलतापूर्व इसका संचालन कर रहे हैं. कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपए है और करीब 20-25 लाख रुपए की बचत होती है.
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2022 में हृदेश ने आईडीबीआई बैंक से 10 लाख रुपए का ऋण लिया. यह ऋण भारत सरकार की क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) योजना के तहत लिया गया था. इससे कारोबार को विस्तार देने में मदद मिली.
प्राइवेट जॉब छोड़कर शुरू किया काम
हृदेश बताते हैं कि कोविड से पहले वे आईटी सेक्टर में नौकरी करते थे, जबकि उनके पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा दिल्ली में सैमसंग में कार्यरत थे. हृदेश की इनकम जॉब के अलावा अन्य इन्वेस्टमेंट से करीब 12 लाख हो जाती थी और अभिषेक का 25 लाख का पैकेज था. कोविड के दौरान जब अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर थे, तब उन्होंने किसानों को लगातार खेतों में काम करते देखा. यहीं से दोनों के मन में कृषि से जुड़कर काम करने का विचार आया.
वर्मी कंपोस्टिंग का काम करने वाले एक परिचित से दोनों को इसकी शुरुआती जानकारी मिली. इसके बाद स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई और यूट्यूब वीडियो देखकर वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया सीखी. शुरुआत में छोटे स्तर पर खुद खाद तैयार की. कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि वे जितनी खाद बना रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा बाजार में इसकी मांग है.
किसानों से खरीदते हैं वर्मी कंपोस्ट
उन्होंने उन किसानों से वर्मी कंपोस्ट खरीदना शुरू किया, जिनका तैयार माल बाजार में नहीं बिक पा रहा था. धीरे-धीरे किसानों का नेटवर्क बढ़ता गया और कारोबार ने आकार लेना शुरू कर दिया. आज हृदेश और अभिषेक के साथ करीब 26-27 किसान जुड़े हैं. इनमें जबलपुर के अलावा नागपुर और नीमच क्षेत्र के किसान भी शामिल हैं. दोनों किसानों से तैयार वर्मी कंपोस्ट खरीदते हैं और गुणवत्ता जांच के बाद उसे बाजार में सप्लाई करते हैं. किसानों का सालभर में तैयार होने वाला माल भी कंपनी खरीद लेती है.
इन राज्यों में सप्लाई होती है वर्मा कंपोस्ट
हृदेश के मुताबिक उनके उत्पाद की मांग केवल जबलपुर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. राजस्थान, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और जम्मू-कश्मीर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में वर्मी कंपोस्ट की सप्लाई की जा रही है. विभिन्न कंपनियों और संस्थानों को भी खाद उपलब्ध कराई जा चुकी है. हृदेश बताते हैं कि कारोबार की शुरुआत में उन्होंने अपना प्लांट लगाया था, लेकिन बाद में खुद उत्पादन करने के बजाय किसानों के साथ काम करने का मॉडल अपनाया. अब वे किसानों से वर्मी कंपोस्ट खरीदकर उसकी गुणवत्ता जांचते हैं और इसके बाद ग्राहकों को सप्लाई करते हैं.
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खाद की गुणवत्ता जांच के लिए कंपनी का अपना क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम है. निर्धारित गुणवत्ता और सामग्री के मानकों पर खरा उतरने के बाद ही खाद बाजार में भेजी जाती है. वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में एसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का उपयोग किया जाता है. हृदेश के अनुसार भारतीय जलवायु में यह प्रजाति वर्मी कंपोस्टिंग के लिए बेहतर अनुकूल है.
