40 लाख की नौकरी छोड़ किसान बने जबलपुर के शिवेंद्र, नेट फार्मिंग से हर सीजन में कमा रहे 3-4 लाख रुपये

MP News: शिवेंद्र बताते हैं कि पुणे में नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि पुणे के किसान नेट हाउस तकनीक का उपयोग कर मौसम के विपरीत भी फसलें उगा रहे हैं. इसी अनुभव ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया. जबलपुर आने के बाद उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया
jabalpur it professional shivendra became farmer net house farming earning 3-4 lakhs per season

जबलपुर: शिवेंद्र नेट हाउस फार्मिंग से हर सीजन में कमा रहे 3-4 लाख रुपये

MP News: खेती को अगर लाभ का धंधा बनाना है तो नई तकनीक और आधुनिक खेती को अपनाना होगा. जबलपुर में ऐसे ही एक युवा ने 40 लाख की नौकरी छोड़कर खेती को लाभ का धंधा बना दिया है. कभी आईटी कंपनी में एसोसिएट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत रहे और सालाना 40 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी करने वाले शिवेंद्र सिंह सेंगर आज आधुनिक खेती के क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं. कोविड-19 के दौर में पुणे से जबलपुर लौटे शिवेंद्र ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कहकर खेती में भविष्य तलाशने का फैसला लिया. आज वे सिहोरा क्षेत्र के ग्राम आश्रम में नेट हाउस फार्मिंग के माध्यम से न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

तीन ऑफ सीजन फसल उगा रहे हैं

शिवेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2023 में उन्होंने सिहोरा के पास ग्राम आश्रम में लगभग 6 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से 6 एकड़ भूमि खरीदी. शुरुआत में उन्होंने डेयरी फार्मिंग और पारंपरिक खेती में हाथ आजमाया, लेकिन जल्द ही आधुनिक तकनीक आधारित खेती की ओर रूख कर लिया. वर्तमान में वे एक एकड़ क्षेत्र में स्थापित नेट हाउस से सालभर में तीन ऑफ सीजन फसलें ले रहे हैं, जिससे प्रत्येक सीजन में उन्हें 3 से 4 लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है. शेष पांच एकड़ भूमि में वे मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं.

शिवेंद्र का क्या कहना है?

शिवेंद्र बताते हैं कि पुणे में नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि पुणे के किसान नेट हाउस तकनीक का उपयोग कर मौसम के विपरीत भी फसलें उगा रहे हैं. इसी अनुभव ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया. जबलपुर आने के बाद उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और नेट हाउस फार्मिंग की तकनीकी जानकारी के साथ-साथ उपलब्ध शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त की.

शिवेंद्र ने एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 28 लाख 50 हजार रुपये की लागत से नेट हाउस स्थापित किया. इस परियोजना में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा एमआईडीएच (मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर) योजना के अंतर्गत उन्हें 14 लाख 25 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई. इसके अतिरिक्त पहले वर्ष बीज एवं अन्य कृषि कार्यों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई गई.

हाइब्रिड बीज, सामान्य से तीन गुने महंगे

शिवेंद्र ने बताया कि ऑफ-सीजनेबल फसलों के लिए उपयोग होने वाले हाइब्रिड बीज सामान्य बीजों की तुलना में लगभग तीन गुना महंगे होते हैं. जहां सामान्य फसल का बीज सस्ता होता है, वहीं हाइब्रिड बीज की कीमत 2 से 6 रुपये या उससे अधिक होती है. हालांकि इन बीजों से उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर मिलने के कारण किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त होता है.

शिमला मिर्च की खेती से शुरुआत की

नेट हाउस में उन्होंने सबसे पहले कैप्सिकम (शिमला मिर्च) की खेती की. इसके बाद गेंदा फूल और खीरे की फसल ली. वर्तमान में उनके नेट हाउस में खीरे की उन्नत हाइब्रिड किस्म की खेती की जा रही है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है.

ये भी पढ़ें: मऊगंज में PM की अपील पर भारी पड़ा VVIP कल्चर! ब्लैक स्पॉट निरीक्षण में निकला 8 गाड़ियों का काफिला

जिले में और किसानों ने नेट फार्मिंग शुरू की

शिवेंद्र सिंह का कहना है कि जब उन्होंने नेट हाउस फार्मिंग शुरू की थी, तब जिले में इस तकनीक को अपनाने वाले किसान नहीं थे. उनकी सफलता को देखकर अब जिले में तीन से चार अन्य किसानों ने भी नेट हाउस फार्मिंग शुरू की है और उन्हें भी बेहतर आय प्राप्त हो रही है.

आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं का लाभ और नवाचार की सोच के साथ शिवेंद्र सिंह सेंगर ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह किसी भी उच्च वेतन वाली नौकरी से कम लाभकारी नहीं है. उनकी सफलता की कहानी आज युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है.

ज़रूर पढ़ें