जबलपुर के नरेंद्र रजक ने मरकर भी दिया जीवनदान, हार्ट-लीवर अहमदाबाद भेजे गए, किडनी जबलपुर में होंगी ट्रांसप्लांट
मृतक नरेंद्र रजक बॉडी
Jabalpur News: सड़क हादसे का शिकार हुए जबलपुर के रहने वाले नरेंद्र रजक मृत्यु के बाद भी कई लोगों को जीवन दान दे गए. ब्रेन डेड हो चुके नरेंद्र रजक का हार्ट और लीवर, किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं. जिसके लिए जबलपुर के निजी अस्पताल से जबलपुर एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और फिर जबलपुर के एयरपोर्ट से मानव अंगों को लेकर फ्लाइट के जरिए अहमदाबाद की अस्पताल में पहुंचाया गया.
नरेंद्र रजक के अंगों से कई मरीजों को मिला नया जीवन
दरअसल, जबलपुर की गुप्तेश्वर में रहने वाले नरेंद्र रजक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गए थे. लगभग ब्रेन डेड हालत में वह जबलपुर के एक निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां उनका पिछले दो दिनों से इलाज चल रहा था, लेकिन ब्रेन डेड होने की वजह से उनके रिकवर होने की उम्मीद पूरी तरह की से खत्म हो चुकी थी.
परिजनों ने फैसला लिया कि उनके अंग दूसरे मरीजों को जीवन दान देंगे और इसलिए परिजनों ने नरेंद्र के अंगदान करने का फैसला किया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन जिला प्रशासन और डुमना एयरपोर्ट प्रबंधन ने मिलकर नरेंद्र के कई अंगों को अलग-अलग जगह पर पहुंचा है.
दोनों किडनी जबलपुर में होंगी ट्रांसप्लांट
नरेंद्र के लीवर और हार्ट को अहमदाबाद फ्लाइट के जरिए पहुंचाया गया. एक किडनी निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी. वहीं दूसरी किडनी जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज को लगाई जाएगी. इसके साथ-साथ आंखें और स्किन को भी दान किया गया है.
रात में बंद रहता है डुमना एयरपोर्ट
अंगदान की इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रशासन से लेकर डुमना प्रबंधन तक ने सराहनी पहल की. जबलपुर के एयरपोर्ट पर रात को फ्लाइट लैंडिंग नहीं होती है, लेकिन अंगदान की प्रक्रिया को समय रहते पूरा करने के लिए डुमना प्रबंधन ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से बातचीत कर रात में ही एयर एंबुलेंस के जरिए लीवर और हार्ट को अहमदाबाद पहुंचा है.
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अहमदाबाद पहुंचाए गए मानव अंग
जबलपुर हवाई अड्डे से मानव अंग को एंबुलेंस फ्लाइट के माध्यम से अहमदाबाद स्थित अस्पताल तक पहुंचाने के लिए किए गए सराहनीय प्रयास ने एक बार फिर मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल पेश की है. इस महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील कार्य को सफल बनाने में विमानपत्तन निदेशक श्री राजेश कुमार मौर्य, एटीसी प्रभारी श्री नीरज गुडवानी तथा उनकी पूरी टीम के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा.
उनके आपसी समन्वय, तत्परता और अथक प्रयासों से जबलपुर में ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे मानव अंग को निर्धारित समय में अहमदाबाद के अस्पताल तक पहुंचाने में सहायता मिली.