MP High Court: जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग वाली दो याचिकाओं का निपटारा करते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं को पहले 25-25 फलदार पौधे लगाने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि इसके बाद विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों और लगाए गए नए पौधों की वास्तविक संख्या का प्रामाणिक आंकड़ों के आधार पर अध्ययन किया जाए.
याचिकाओं में यह भी उल्लेख किया गया था कि हाई कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ ने 1 मार्च 2025 को 24 सितंबर 2015 की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत 53 प्रजातियों के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी.
याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि इन मामलों को दायर हुए करीब नौ वर्ष बीत चुके हैं. इस अवधि में राज्य में कई नए राजमार्गों और सड़कों का निर्माण हो चुका है. हालांकि, याचिकाओं में इस बात के स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि वास्तव में कितने पेड़ काटे गए और उनके स्थान पर कितने नए पौधे लगाए गए. अदालत ने कहा कि केवल यह दावा करना पर्याप्त नहीं है कि पेड़ों की कटाई हो रही है और नए पौधे नहीं लगाए जा रहे. वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए प्रामाणिक आंकड़ों के साथ विस्तृत अध्ययन किया जाना जरूरी है.
जबलपुर में पौधरोपण का दिया उदाहरण
हाई कोर्ट ने कहा कि यह मान लेना उचित नहीं होगा कि प्रदेश में केवल पेड़ों की कटाई हो रही है और पौधरोपण नहीं किया जा रहा है. पीठ ने उदाहरण देते हुए कहा कि इंदौर में पिछले वर्ष 12 लाख पौधे लगाए गए थे और इसकी वर्षगांठ पिछले सप्ताह ही मनाई गई है. इसके अलावा जबलपुर नगर निगम ने भी इस वर्ष 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
पहले 25-25 फलदार पौधे लगाने के निर्देश
हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को पहले 25-25 फलदार पौधे लगाने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही उन्हें प्रदेश में पेड़ों की कटाई और नए पौधों के रोपण की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने को कहा गया है. अदालत ने कहा कि यदि अध्ययन के बाद ठोस आंकड़ों के आधार पर जरूरत महसूस होती है तो याचिकाकर्ता नई याचिका के माध्यम से अदालत का रुख कर सकते हैं. इस निर्देश के साथ हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग वाली दोनों याचिकाओं का निपटारा कर दिया.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग वाली दो याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को पहले स्वयं 25-25 फलदार पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने कहा कि पौधे लगाने के बाद याचिकाकर्ता प्रदेश में विकास कार्यों के दौरान काटे गए पेड़ों और उनके स्थान पर लगाए गए नए पौधों की वास्तविक संख्या का गहन अध्ययन करें. अदालत ने स्पष्ट किया कि ठोस आंकड़े जुटाने के बाद यदि आवश्यकता महसूस हो तो नई याचिका दायर की जा सकती है.
2018 में दाखिल हुई थीं दोनों याचिकाएं
जबलपुर निवासी विवेक कुमार शर्मा और नीमच निवासी आनंद मनावत ने वर्ष 2018 में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में सड़क निर्माण के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है, जबकि नियमानुसार पर्याप्त संख्या में नए पौधे नहीं लगाए जा रहे हैं
