MP News: मध्य प्रदेश में भी सरकार यूसीसी कानून को जल्द लागू करने की तैयारी में जुट गई. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि मध्य प्रदेश में जल्द ही समान नागरिक संहिता कानून लागू किया जाएगा और इसके लिए अब जमीन स्तर पर भी तैयारी देखने लगी यूसीसी कानून को लेकर उच्च स्तरीय कमेटी की जबलपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सामाजिक संगठन राजनीतिक दल के नेता अलग-अलग धर्म की जानकार, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और महिला संगठनों को शामिल किया गया.
UCC को लेकर उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक का हुआ आयोजन
समान नागरिक संहिता को लेकर जबलपुर में उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में सभी दलों के राजनेता और जनप्रतिनिधि समेत आला अधिकारी शामिल हुए. बैठक में सांसद आशीष दुबे महापौर जगत बहादुर सिंह अनु भाजपा विधायक और कांग्रेस के पूर्व विधायकों ने भी हिस्सा लिया. बैठक में उच्च स्तरीय कमेटी के सदस्यों ने समान नागरिक संहिता कानून की बारीकियाँ बताई. साथ ही बैठक में शामिल होने आए सभी लोगों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी. जिस पर अलग-अलग लोगों ने अपनी राय दी.
रखे गए तरह-तरह के सुझाव
कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय यादव ने यूसीसी कानून को पंचायत स्तर पर मतदान के जरिए जनता की राय लेने की सलाह दी है वही मुस्लिम समुदाय से आए नेताओं का कहना है कि इस्लाम में पहले से ही महिलाओं को अधिकार दिए गए हैं ऐसे में अन्य कानून की जरूरत नहीं है. वही सामाजिक संगठनों का कहना है कि देश में शादी की उम्र लड़की की भी 21 साल कर देनी चाहिए ताकि आज के आधुनिकता की दौड़ में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों को मौका मिल सके और समाज शिक्षित हो सके. बैठक में तरह-तरह की सुझाव कमेटी के सामने रखे गए हैं बीजेपी के नेताओं का कहना है कि यूसीसी कानून की जानकारी आम जनता तक पहुंच सके इसलिए सरकार उच्च स्तरीय कमेटी के जरिए जनता तक पहुंच रही है और माइक्रो ऑब्जर्व करके ही कानून को लागू करेगी.
पहली बार किसी कानून को लेकर जनता की राय लेगी सरकार
हालांकि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है जब किसी कानून को लेकर जनता की रैली जा रही है इसके पहले कानून बनाने के लिए सरकार ने कभी जनता की राय नहीं ली लेकिन इस बार समान नागरिक संहिता कानून लागू करने के पहले मध्य प्रदेश सरकार ग्राउंड पर जाकर जनता के सुझाव और आपत्ति मांग रही है जबलपुर में आयोजित हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध किया उनका कहना है कि समान नागरिक संहिता कानून लागू होने से इस्लाम में बनाए गए नियम कमजोर हो जाएंगे वहीं वहीं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आदिवासियों और महिलाओं के अधिकारों पर भी सुझाव दिए हैं
