MP News: केंद्र सरकार द्वारा आईपीएस अधिकारियों के एम्पैनलमेंट नियमों में किए गए बदलाव के बाद मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अफसरों पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का बड़ा दबाव बन गया है. नए नियमानुसार 2011 बैच और उसके बाद के आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में आईजी स्तर पर एम्पैनलमेंट पाने से पहले एसपी या डीआईजी रैंक पर कम से कम दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी.
केंद्र के निर्देश पर होगी प्रतिनियुक्ति
इस फैसले को केंद्र की उस नीति की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत करीब चार महीने पहले केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने को लेकर पुलिस मुख्यालय को कहा था. उस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि केंद्र के अधीन विभिन्न विभागों और केंद्रीय पुलिस संगठनों में एसपी और डीआईजी स्तर पर अधिकारियों की कमी है और राज्यों से पर्याप्त संख्या में अफसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं.
आईपीएस को दो साल का डेप्युटेशन जरूरी
अब नए एम्पैनलमेंट नियम लागू होने के बाद यह पत्र एक तरह से अनिवार्यता में बदल गया है. मध्य प्रदेश कैडर के वे आईपीएस अधिकारी, जिन्होंने अब तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति नहीं ली है, उनके लिए भविष्य में केंद्र में सेवा देना लगभग अनिवार्य सा हो गया है. यदि वे आगे चलकर केंद्र सरकार में आईजी स्तर के लिए एम्पैनल्ड होना चाहते हैं, तो उन्हें तय अवधि तक कम से कम दो साल के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना ही होगा.
इन अफसरों को जाना होगा दिल्ली
मध्य प्रदेश कैडर के 2011 बैच के रियाज इकबाल, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद और डॉ. असित यादव तथा 2012 बैच के मयंक अवस्थी, विवेक सिंह, कुमार प्रतीक, शिव दयाल और शैलेन्द्र सिंह चौहान ऐसे अधिकारी हैं, जो अब तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं गए है. ये सभी अफसर अब डीआईजी हो गए हैं, इन अफसरों को अब तीन-चार साल के भीतर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना होगा.
नियमानुसार डीआईजी पद पर आईपीएस अफसर को चार साल की सेवाएं देना होती है. ऐसे में वर्ष 2011 के बैच के अफसरों के पास अब तीन साल का समय है, जबकि 2012 बैच के अफसरों के पास चार साल का समय है. इसके बाद के बैच के अफसरों के पास चार साल से ज्यादा का समय है, जिसमें वे केंद्र में जाने का निर्णय ले सकते हैं.
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एसपीएस से आईपीएस की संख्या ज्यादा
ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले का उद्देश्य केंद्रीय पुलिस संगठनों और मंत्रालयों में एसपी और डीआईजी स्तर पर लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना है. वहीं, राज्य स्तर पर इसका खासा असर नहीं होगा, क्योंकि यहां पर राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस बने अफसरों की संख्या बहुत है. इस नियम के बाद आने वाले समय में एक साथ कई आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं.
