MP News: प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू होने के बाद जहां बिजली खपत की पारदर्शिता और रियल टाइम मॉनिटरिंग बढ़ी है, वहीं सरकारी विभागों की भुगतान क्षमता और अनुशासन पर सवाल खड़े होने लगे हैं. ताजा मामला जल संसाधन विभाग मध्य प्रदेश से जुड़ा है, जिसके 11 जिलों के कार्यालयों पर करीब 47 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया बताया गया है.
बकाया राशि भुगतान के लिए निर्देश दिया गया
सूत्रों के मुताबिक, स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद वास्तविक खपत का आंकड़ा सामने आया, जिससे लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट हो गई. इसके बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. जल संसाधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर बकाया राशि के त्वरित भुगतान के निर्देश दिए हैं.
पत्र में क्या कहा गया है?
- पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विद्युत आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
- जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 11 जिलों में स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालयों और संबंधित इकाइयों पर कुल मिलाकर लगभग 47 करोड़ रुपये का बिजली बिल लंबित है.
- विभाग की ओर से पूर्व में भी भुगतान के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन इंजीनियरिंग विंग द्वारा राशि जारी नहीं की गई.
- इससे बिजली कंपनियों की देनदारी बढ़ती गई.
भुगतान नहीं होने पर कट सकते हैं कनेक्शन
स्मार्ट मीटरिंग के बाद बिजली खपत का डेटा स्वतः दर्ज हो रहा है और बिलिंग भी उसी आधार पर तैयार हो रही है. ऐसे में बकाया राशि छिपी नहीं रह पा रही. बिजली वितरण कंपनियों ने भी संकेत दिए हैं कि यदि भुगतान में और देरी होती है तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है. हालांकि सरकारी विभागों के मामले में सीधी कटौती जैसे कदम आमतौर पर अंतिम विकल्प के रूप में ही उठाए जाते हैं.
अधीक्षण-कार्यपालन अभियंताओं को निर्देश जारी
मुख्य अभियंता ने अतिरिक्त मुख्य सचिव के पत्र के बाद संबंधित जिलों के अधीक्षण और कार्यपालन अभियंताओं को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने कार्यालयों का लंबित बिल तत्काल अदा करें. साथ ही भविष्य में नियमित भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बन जाए.
विभागीय वित्तीय अनुशासन की स्थिति सामने आई
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से जहां पारदर्शिता आई है, वहीं इससे विभागीय वित्तीय अनुशासन की वास्तविक स्थिति भी उजागर हो रही है. पहले अनुमानित बिलिंग या विलंबित रीडिंग के कारण बकाया राशि धीरे-धीरे बढ़ती थी और समय पर संज्ञान में नहीं आ पाती थी.अब हर माह की सटीक खपत सामने आने से भुगतान में देरी सीधे रिकॉर्ड में दर्ज हो रही है.
