MP News: मध्य प्रदेश के न्याय जगत में संभवत यह पहली बार हुआ है जब महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्त किए गए अधिवक्ताओं की नियुक्तियों पर सवाल खड़े हुए हैं और मामला हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की बेंच में पहुंच चुका है. मामला इतना गंभीर है कि हाईकोर्ट ने न केवल राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, बल्कि नियुक्त हुए तमाम 157 सरकारी वकीलों को भी नोटिस जारी किया गया हैं.
नियमों की अनदेखी करते हुए लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति का आरोप
मामला 25 दिसंबर 2025 को महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्त किए गए 157 लॉ ऑफिसर्स यानी शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति का है. जिसमें नियमों की अनदेखी करते हुए लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति करने के आरोप लगाए गए थे. एडवोकेट योगेश सोनी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी थी.
कोर्ट ने सभी पक्षों ने जवाब मांगा
हाईकोर्ट में आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 28 फरवरी 2013 के नियम का हवाला देते हुए महाधिवक्ता कार्यालय ने विज्ञापन जारी किया था. जिसमें स्पष्ट उल्लेखित किया गया कि महाधिवक्ता कार्यालय में लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति के लिए कम से कम 10 साल का हाईकोर्ट में प्रैक्टिस का अनुभव होना आवश्यक है. लेकिन जब नियुक्तियां की गईं, तो उसमें 30 अधिवक्ता ऐसे नियुक्त किए गए, जिनकी योग्यता इस नियम के अनुसार नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट दिनेश उपाध्याय ने बताया कि दिल्ली और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड अधिवक्ताओं को भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लॉ ऑफिसर्स बना दिया गया. ऐसे में यह नियुक्तियां राजनीतिक प्रभाव वाली नजर आती हैं. बहरहाल हाई कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए 2 फरवरी तक सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है.
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