देवतालाब शिव मंदिर में आस्था के नाम पर लाखों का खेल! 24 घंटे में ₹5.63 लाख की बंदरबांट, मऊगंज में RTI से हुआ खुलासा
देवतालाब शिव मंदिर.
MP News: मऊगंज जिले के प्रसिद्ध शिव मंदिर देवतालाव शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े पैसों के उपयोग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि महाशिवरात्रि मेले की आड़ में मात्र 24 घंटे के अंदर 5,63,500 रुपये के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जबकि संबंधित खर्चों को लेकर न तो प्रबंध समिति का स्पष्ट प्रस्ताव पारित हुआ और न ही नियमानुसार निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अपनाई गई. इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
बैठक में ‘लाखों के खेल’ का जिक्र नहीं
RTI दस्तावेजों के अनुसार 13 फरवरी 2026 को आयोजित प्रबंध समिति की बैठक में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष एवं वर्तमान विधायक गिरीश गौतम की अध्यक्षता में एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारी मौजूद थे. बैठक के कार्यवृत्त में केवल वाहन पूजा शुल्क, वीआईपी दर्शन, शहनाई वादन और प्रत्येक सोमवार ध्वजा परिवर्तन जैसे विषय दर्ज हैं. आरोप है कि फूलों की सजावट, महाप्रसाद वितरण और टेंट व्यवस्था जैसे लाखों रुपये के खर्च का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया, लेकिन दो दिन बाद ही भुगतान संबंधी फाइलें आगे बढ़ गईं.
क्या पहले तय था पूरा खेल?
आरोप है कि महाशिवरात्रि शुरू होने से पहले ही लाखों रुपये के बिल तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. सवाल उठ रहा है कि जब किसी खर्च की प्रशासनिक मंजूरी ही नहीं थी, तो फिर इतनी तेजी से भुगतान कैसे स्वीकृत हो गया? क्या नियमों को दरकिनार कर पहले से पूरी व्यवस्था तय कर ली गई थी?
महाप्रसाद और टेंट भुगतान भी सवालों के घेरे में
RTI दस्तावेजों में फूलों की सजावट, महाप्रसाद वितरण, टेंट और शहनाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान का उल्लेख है. आरोप है कि इन कार्यों के लिए किसी प्रकार की निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में उतनी भव्य सजावट दिखाई नहीं दी, जितनी राशि का भुगतान दर्शाया गया है. इसी कारण भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
2026 के मेले में 2025 के बिल!
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि RTI दस्तावेजों में वर्ष 2025 के कुछ पुराने बिलों को भी वर्ष 2026 के महाशिवरात्रि मेले के खर्च में शामिल करने का उल्लेख है. आरोप है कि हार्डवेयर, पेंट और अन्य सामग्री से जुड़े पुराने बिलों का भुगतान मेले के खर्च के साथ जोड़ दिया गया.
दस्तावेजों के अनुसार नोटशीट में तत्कालीन तहसीलदार ने स्पष्ट टिप्पणी दर्ज की थी कि शिव मंदिर प्रबंध समिति के अनुमोदन के पश्चात ही भुगतान किया जाना उचित होगा. इसके बावजूद आरोप है कि भुगतान को स्वीकृति दे दी गई. इस प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
दान विकास में लगा या कागजों में खर्च हो गया?
देवतालाब शिव मंदिर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और श्रद्धा से दान अर्पित करते हैं. ऐसे में दानराशि के उपयोग को लेकर उठे इन आरोपों ने लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है. स्थानीय नागरिक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सभी भुगतानों के सत्यापन और यदि कोई अनियमितता सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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