आरोप है कि फूलों की सजावट, महाप्रसाद वितरण और टेंट व्यवस्था जैसे लाखों रुपये के खर्च का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया, लेकिन दो दिन बाद ही भुगतान संबंधी फाइलें आगे बढ़ गईं.