मऊगंज में अवैध बोर उत्खनन पर प्रशासन सख्त! बोरिंग माफिया पर बड़ी कार्रवाई, दो मशीनें जब्त

Mauganj News: विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बोरिंग के कारण भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. यदि इसी तरह अवैध उत्खनन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कई गांवों में पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है. प्रशासन की यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि जल संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है.
Mauganj administration takes action against illegal borewell drilling

मऊगंज: अवैध बोर उत्खनन पर प्रशासन की कार्रवाई

Mauganj News: मऊगंज जिले में भू-जल संरक्षण को लेकर जारी सरकारी प्रयासों के बीच कुछ लोग चंद रुपयों के लालच में धरती की कोख को छलनी करने में लगे थे. शासन के स्पष्ट प्रतिबंध और प्रशासनिक आदेशों को खुलेआम चुनौती देकर अवैध बोरिंग का कारोबार चलाया जा रहा था, लेकिन शनिवार की शाम प्रशासन ने ऐसा शिकंजा कसा कि पूरे अवैध नेटवर्क में भगदड़ और हड़कंप मच गया.

पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई

नईगढ़ी तहसील के ग्राम हंड़िया में कलेक्टर संजय कुमार जैन के निर्देश पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए दो अवैध बोरिंग मशीनों को रंगे हाथों जब्त कर लिया. बताया जा रहा है कि मशीनें बिना किसी वैधानिक अनुमति के बोरवेल उत्खनन कर रही थीं और भू-जल संसाधनों का खुलेआम दोहन किया जा रहा था.

बोरवेल और हैंडपंप उत्खनन पर प्रतिबंध

जिले में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है. कई गांवों में पानी का संकट गहराने लगा है. ऐसे हालात में प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक बोरवेल और हैंडपंप उत्खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है. इसके बावजूद ग्राम हंड़िया में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बोरिंग मशीनें दौड़ाई जा रही थीं. सूचना मिलते ही तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी और थाना प्रभारी ऋषि कुमार द्विवेदी पुलिस बल और राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे. जांच में वाहन क्रमांक टीएन-77 डी 2007 एवं टीएन-77 डी 2008 की मशीनें अवैध उत्खनन करते पाई गईं. प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों मशीनों को जब्त कर नईगढ़ी थाना के सुपुर्द कर दिया.

प्रशासनिक आदेशों की उड़ाई जा रही थी धज्जियां

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में प्रतिबंध लागू है तो आखिर अवैध बोरिंग का यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा था? क्या माफियाओं को कार्रवाई का डर नहीं था या फिर उन्हें किसी अदृश्य संरक्षण का भरोसा था? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो क्षेत्र में और भी कई स्थानों पर अवैध बोरिंग कर भू-जल का अंधाधुंध दोहन किया जाता. यह केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकारों पर डाका डालने जैसा अपराध है.

एफआईआर की तलवार लटकी

प्रशासन ने मशीन मालिकों, चालकों और पूरे अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 188 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ी तो कई और नाम सामने आ सकते हैं. कार्रवाई के बाद जिलेभर में सक्रिय अवैध बोरिंग संचालकों के बीच दहशत का माहौल है. कई स्थानों पर मशीनें बंद कर दी गई हैं और संचालक भूमिगत होने की चर्चाएं भी तेज हैं.

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भूजल की लूट पर प्रशासन का युद्ध

विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बोरिंग के कारण भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. यदि इसी तरह अवैध उत्खनन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कई गांवों में पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है. प्रशासन की यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि जल संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है.

अब पूरे जिले पर निगाहें

ग्राम हंड़िया में हुई कार्रवाई के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. आमजन चाहते हैं कि प्रशासन केवल एक गांव तक सीमित न रहे बल्कि पूरे जिले में अभियान चलाकर अवैध बोरिंग माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करे. यदि इसी तरह लगातार कार्रवाई जारी रही तो भू-जल के सौदागर और प्राकृतिक संसाधनों को निजी कमाई का जरिया बनाने वाले तत्वों पर बड़ी चोट पड़ सकती है.

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