मऊगंज हाईवे पर डिजिटल वसूली! 17 मिनट में 3 ट्रांजेक्शन से 60 हजार की उगाही, जांच के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल

MP News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक कथित 'डिजिटल वसूली कांड' सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Gaurav Rajput, Inspector General of Police, Rewa Zone

गौरव राजपूत पुलिस महानिरीक्षक रीवा जोन

MP News: मऊगंज जिले से एक यातायात प्रभारी से जुड़ा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जब कानून के रखवाले ही हाईवे के लुटेरे बन जाएं और खाकी वर्दी पर ‘गुंडा टैक्स’ वसूलने के आरोप लगने लगें, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक कथित ‘डिजिटल वसूली कांड’ सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

डिजिटल वसूली के गंभीर आरोप

महज 17 मिनट, 3 ट्रांजेक्शन और 60 हजार रुपये. आरोप है कि सिर्फ 17 मिनट के भीतर सौदेबाजी हुई और फोन-पे के जरिए 60 हजार रुपये की रिश्वत वसूल ली गई. नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन कथित तौर पर मऊगंज पुलिस के लिए कमाई की ‘एटीएम मशीन’ बन चुके हैं. यातायात प्रभारी नरेश सिंह, हनुमना थाने के एक आरक्षक और इनके बीच कथित तौर पर काली कमाई को सफेद करने का काम करने वाला मुकेश त्रिपाठी.

आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर ऐसा सिंडिकेट खड़ा कर लिया है, जिसके डिजिटल सबूत और स्टिंग ऑपरेशन सामने आने का दावा किया जा रहा है. आईजी के निर्देश पर एसपी मऊगंज ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आरोपों और कथित सबूतों के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मी अब तक अपनी कुर्सियों पर क्यों जमे हुए हैं?

31 मई की घटना का दावा

तारीख 31 मई, शाम करीब 4 बजे. सूत्रों के अनुसार, मऊगंज बायपास पर गैलेक्सी होटल के पास हाईवे से गुजर रहे ट्रक नंबर BR45 GB3523 को यातायात प्रभारी नरेश सिंह ने रोका. आरोप है कि पहले दस्तावेजों के नाम पर वाहन चालक को धमकाया गया और फिर कथित वसूली का खेल शुरू हुआ. ट्रक चालक से सीधे 2 लाख रुपये की मांग की गई. उसे कहा गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो वाहन जब्त कर लिया जाएगा और 2 लाख रुपये से अधिक की पेनाल्टी अलग से लगेगी.

घबराए चालक ने अपने वाहन मालिक को फोन किया. इसके बाद वाहन मालिक ने अपने मित्र आशीष पांडे से मदद मांगी. यहीं से कहानी में पुलिस के कथित ‘प्राइवेट कैशियर’ मुकेश कुमार त्रिपाठी की एंट्री होती है.

पूर्व डाटा ऑपरेटर पर भी आरोप

बताया जाता है कि मुकेश त्रिपाठी कभी हनुमना चेक पोस्ट पर डाटा एंट्री ऑपरेटर था. चेक पोस्ट बंद होने के बाद अब उस पर अवैध वसूली की रकम को सफेद करने का आरोप लगाया जा रहा है. आरोप है कि मुकेश ने इस पूरे सौदे में हनुमना थाने के एक आरक्षक को शामिल किया. आरक्षक कथित तौर पर मध्यस्थ बनकर सीधे यातायात प्रभारी के पास पहुंचा और अपने मोबाइल फोन से यातायात प्रभारी की बात मुकेश त्रिपाठी से करवाई.

17 मिनट में 60 हजार रुपये ट्रांसफर

सूत्रों का दावा है कि 2 लाख रुपये की कथित अवैध मांग आखिरकार 70 हजार रुपये में तय हुई. इसके बाद फोन-पे के जरिए रकम भेजने का सिलसिला शुरू हुआ. आरोप है कि शाम 5:28 बजे 30 हजार रुपये, 5:37 बजे 20 हजार रुपये और 5:45 बजे 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल 60 हजार रुपये सीधे मुकेश त्रिपाठी के खाते में पहुंचाए गए. बाकी बचे 10 हजार रुपये के लिए भी लगातार फोन किए जाने का आरोप लगाया गया है.

वाहन मालिक ने लगाए गंभीर आरोप

हमारी तहकीकात और स्टिंग के दौरान वाहन मालिक और उनके मित्र आशीष पांडे ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि इस कथित अवैध वसूली के कारण वाहन मालिक की गाड़ी की किस्त टूट गई और उसका व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है. आरोप है कि मऊगंज में यह खेल नया नहीं है. सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जब यातायात प्रभारी को शहर की यातायात व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है, तो नेशनल हाईवे पर ट्रकों को रोकने का अधिकार उन्हें किस आधार पर प्राप्त है?

अन्य वाहनों से भी वसूली के आरोप

आरोप यह भी है कि अगले ही दिन तीन अन्य ट्रेलरों को रोका गया और उनसे 6-6 हजार रुपये की मांग की गई. बाद में कथित तौर पर यह मामला 500-500 रुपये की रिश्वत और 2 हजार रुपये के चालान पर जाकर सुलझा. वाहन चालकों का आरोप है कि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. यातायात प्रभारी नरेश सिंह पहले भी विवादों में रहे हैं. वहीं, इस पूरे मामले में हनुमना थाना के कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

आईजी के निर्देश पर जांच शुरू

जब इस कथित अवैध वसूली और फोन-पे ट्रांजेक्शन से जुड़े आरोपों को लेकर रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गौरव राजपूत से सवाल किया गया, तो उन्होंने तत्काल मऊगंज पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरेंद्र जैन को जांच के निर्देश दिए. जांच शुरू हो चुकी है. जानकारों का मानना है कि यदि जांच एजेंसियां मुकेश त्रिपाठी और संबंधित पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की निष्पक्ष जांच करें, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है.

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच शुरू होने के बावजूद संबंधित अधिकारी और पुलिसकर्मी अब भी अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं? क्या जांच पूरी होने तक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है? अब सबकी निगाहें एसपी मऊगंज की जांच पर टिकी हैं. देखना होगा कि यह जांच कथित ‘वर्दी वाले लुटेरों’ के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर पाती है या फिर हर बार की तरह सिस्टम उन्हें बचाने का कोई नया रास्ता निकाल लेता है.

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