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मऊगंज के लाल ने BPSC में गाड़े झंडे! हौसले के आगे पस्त हुई मुसीबतें, पुष्पेंद्र चतुर्वेदी बने राजस्व अधिकारी

mauganj Pushpendra Chaturvedi became Revenue Officer Bihar Public Service Commission examination

मऊगंज के पुष्पेंद्र चतुर्वेदी बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी बने

Mauganj News: विंध्य की धरती ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. मऊगंज जिले के मगनिया गांव के रहने वाले दिव्यांग युवा पुष्पेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) का पद प्राप्त किया है. पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया और कठिन संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया.

रचा सफलता का इतिहास

कहा जाता है कि जब इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं. पुष्पेंद्र ने इसी कहावत को सच साबित किया है. शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने लगातार पढ़ाई जारी रखी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहे. वर्षों की मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का परिणाम आज उनके राजस्व अधिकारी बनने के रूप में सामने आया है.

पुष्पेंद्र के पिता वन विभाग में कार्यरत

पुष्पेंद्र के पिता वन विभाग में कार्यरत हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा रीवा में हुई. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी करना था, लेकिन इसी दौरान उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी दी और पहली बड़ी प्रशासनिक सफलता हासिल कर ली.

‘मैंने कभी खुद को दिव्यांग नहीं माना’

अपनी सफलता पर पुष्पेंद्र कहते हैं कि उन्होंने कभी खुद को दिव्यांग महसूस नहीं होने दिया. वे हमेशा वही कार्य करने का प्रयास करते रहे जो एक सामान्य व्यक्ति करता है. उनका मानना है कि इंसान की असली ताकत उसके शरीर में नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और मेहनत में होती है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिवार और शुभचिंतकों को दिया है.

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विंध्य के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

पुष्पेंद्र की उपलब्धि आज पूरे विंध्य क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी कठिनाई सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती. उनकी उपलब्धि पर मऊगंज, रीवा सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई देकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे हैं.

हौसलों की जीत का नाम है पुष्पेंद्र

पुष्पेंद्र कुमार चतुर्वेदी की यह सफलता केवल एक नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरक गाथा है. उन्होंने साबित कर दिया कि “सफलता पैरों से नहीं, बल्कि हौसलों से चलकर मंजिल तक पहुंचती है.” आज विंध्य का यह दिव्यांग बेटा न केवल बिहार की राजस्व व्यवस्था संभालेगा, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को भी नई उड़ान देगा.

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