Sagar Sharab Kand: सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में शराब ठेकेदार सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है. आबकारी विभाग की ओर से कंपोजिट शराब लाइसेंस निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की बेंच ने खारिज कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि आबकारी विभाग के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पास वैधानिक अपील का विकल्प उपलब्ध है. ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में दायर याचिका पर हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता. अब याचिकाकर्ता संबंधित अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है.
राज्य सरकार ने याचिका की विचारणीयता पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव और उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने याचिका की विचारणीयता पर आपत्ति जताई. सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि याचिका पावर ऑफ अटार्नी के जरिए दाखिल की गई है. साथ ही याचिकाकर्ता के फरार होने की बात भी कोर्ट के सामने रखी गई.
शराब दुकान का लाइसेंस हुआ था निरस्त
सागर में जहरीली शराब की घटना के बाद आबकारी विभाग ने संबंधित शराब दुकान के खिलाफ कार्रवाई की थी. इसी कार्रवाई के तहत सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा का कंपोजिट शराब लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.
20 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत
सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. घटना के बाद सरकार और प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की. आरोपियों के घरों और अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई. मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे चंद्रभान सिंह राजपूत के घर पर भी बुलडोजर चलाया गया.
30 लोगों के खिलाफ एफआईआर
मामले में पुलिस ने करीब 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इनमें से 16 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश करके पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर रही है. आरोपियों में मुख्य आरोपी सरपंच चंद्रभान सिंह राजपूत समेत कई अन्य लोग शामिल हैं. पुलिस कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों के शॉर्ट एनकाउंटर की जानकारी भी सामने आई है.
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