STS कर्मचारी डॉक्टर बनकर करता रहा इलाज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज की हालत बिगड़ने पर खुला ‘राज’
गलत इलाज से पीड़ित मरीज की हालत बिगड़ गई.
MP News: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एसटीसएस कर्मचारी पर आरोप है कि वह दिनों तक डॉक्टर बनकर इलाज करता रहा. कई दिनों के ट्रीटमेंट के बाद मरीज को फायदा नहीं हुआ और उसकी हालत बिगड़ी तो पूरे मामले का पता चला. मरीज का कहनाहै कि आरोपी ने कई दिनों तक इलाज के नाम पर हजारों की दवाइयां दिलवा दीं, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ.
इलाज के नाम पर इंजेक्शन लगवाने के लिए कहता रहा
पूरा मामला पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है. यहां क्षय रोग विभाग में STS के पद पर पदस्थ अरविंद चंदोरिया पर गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर बनकर एक मरीज का इलाज किया, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो गई. जानकारी के अनुसार मरीज रामप्रसाद अहिरवार (47) टीबी के इलाज के लिए पलेरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था. आरोप है कि STS कर्मचारी अरविंद चंदोरिया ने खुद डॉक्टर बनकर मरीज का इलाज किया और मेडिकल स्टोर से लगभग 3500 से 4000 रुपए तक की दवाइयां खिलवा दीं. मरीज का कहना है कि दवाइयों के सेवन के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई.
पीड़ित मरीज ने कॉल के माध्यम से अरविंद चंदोरिया को अपनी गंभीर स्थिति बताई और राहत की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि उसे लगातार इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी जाती रही. मरीज की हालत नाजुक होने पर पता लगा कि आरोपी डॉक्टर नहीं बल्कि विभाग में एसटीएस के पद पर तैनात है.
फर्जी इलाज करके मरीजों के साथ की जा रही ठगी
बताया जा रहा है कि इसके पहले भी आरोपी अरविंद चंदोरिया की लिखित शिकायत जिला स्तर पर की जा चुकी है. लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब मरीजों को निशाना बनाकर ठगी की जा रही है.
इस पूरे मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि जब एक STS कर्मचारी डॉक्टर बनकर इलाज कर रहा था तो अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?
मरीज द्वारा अरविंद चंदोरिया से हुई बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया. अब स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना डिग्री इलाज करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ न हो सके.
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